गुमला में नदी किनारे बन रहे घरों को लेकर नगर परिषद अलर्ट, जानिए क्या है उसकी योजना


गुमला (GUMLA): बढ़ते विकास ने जहां रेत विहीन नदी किये, पेड़ बिना जंगल, वहीं बढ़ती आबादी ने नदियों को सिकुड़ा किया. गुमला की भी यही स्थिति है. नदी किनारे धड़ल्ले से लोग अपना आशियाना बना रहे हैं. इसको लेकर जिला प्रशासन के कान खड़े हुए. अब नगर परिषद की ओर से नदी किनारे बन रहे घरों को चिन्हित किया जा रहा है. संबंधित अधिकारी कहते हैं कि इसका मकसद नदी को अतिक्रमण मुक्त करना है. इसको लेकर नाराजगी है, तो कुछ लोग इसका समर्थन भी कर रहे हैं.
नाले का रूप ले रही नदी
गुमला जिला का शहरी क्षेत्र नदियों से घिरा हुआ है. एक समय था कि चारों तरफ बहने वाली नदियों को देखने के लिए लोग आते थे, लेकिन विगत कुछ वर्षों में जिस तरह से इन नदियों का अतिक्रमण हुआ है, उससे नदियों का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त होने की स्थिति में आ गया है. जिसको लेकर जिला के डीसी सुशांत गौरव के निर्देश के बाद जिला के नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी संजय पांडे गंभीरता से काम कर रहे हैं. फिलहाल पुग्गु नदी के अतिक्रमण को हटाने का काम किया जा रहा है. नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी संजय पांडे ने कहा कि काफी बुरी तरह से नदी का अतिक्रमण किया गया है. लोगों ने नदी की धार पर पिलर खड़ा कर दिया है. वहीं इस अभियान में अंचल के कर्मी भी शामिल है. उन्होंने सरकारी नक्सा के आधार पर बताया कि काफी संख्या में लोगों ने नदी की जमीन का अतिक्रमण कर घर बना लिया है. जिसके कारण नदी अब नाला का रूप लेती जा रही है.
कुछ में निराशा, कुछ ने दिया समर्थन
नगर परिषद की ओर से नदी किनारे के अतिक्रमण कर बनाए गए घरों पर रेड चिन्ह लगाया जा रहा है. वहीं इस अतिक्रमण से सैकड़ो घरों के टूटने की आशका बन रही है. जिसको लेकर कुछ लोगों में निराशा है. वहीं कुछ लोगों ने इसका खुलकर समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि सरकार का जो निर्णय होगा उन्हें स्वीकार है. उन्होंने कहा कि जमीन मालिक से खतियान के आधार पर उन लोगों ने घर बनाया और 1985 से रह रहे हैं, लेकिन अब जिस तरह से पता चल रहा है कि उनके घर का हिस्सा कुछ नदी का हिस्सा है. सरकार जितना चाहे तोड़ सकती है. वहीं नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी संजय पांडे ने कहा कि उनका उद्देश्य नदी के अतिक्रमण को सही करना है साथ ही उन्होंने कहा कि नदी का अतिक्रमण समाप्त नहीं किया गया तो आने वाले समय मे पानी का बहुत बड़ा संकट पैदा हो सकता है, जिससे मानव जाति पर खतरा हो सकता है.
मानव जाति पर खतरा
डीसी के निर्देश के बाद जिला के नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी ईमानदारी से पूरी टीम के साथ काम कर रहे हैं. लेकिन अन्य विभाग से जो सहयोग मिलना चाहिए, उससे उन्हें परेशानी हो रही है. जबकि इस अभियान को अतिआवश्यक समझकर अंजाम तक पहुंचाने की आवश्यकता है. क्योंकि नदी का अस्तित्व जब समाप्त हो जाएगा तो मानव जाति पर खतरा आ सकता है.
रिपोर्ट: सुशील कुमार सिंह, गुमला
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