लंपी वायरस का बढ़ रहा प्रकोप, भुरकुंडा में एक मवेशी की मौत, किसान परेशान


रामगढ़ (RAMGARH) : दूर प्रदेशों में समाचार में सुना जाने वाला वाक्यांश कोयलांचल में अपने पैर पसारने में अपनी दमखम के साथ लगा हुआ है. गोवंश को चपेट में लेने वाला लंपी वायरस ने भदानीनगर ग्रामीण इलाके में दस्तक दे दी है. अब तक इस रोग से तकरबीन आधा दर्जन पशुओं की मौत हो चुकी है. वहीं कई इसकी चपेट में हैं. स्थानीय ग्रामीण इस बीमारी को लेकर खौफजदा हैं. उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि वे अपने पशुधन को लंपी की चपेट से कैसे बचा कर रखें. जानलेवा लंपी वायरस की वजह से भदानीनगर लपंगा पंचायत के सरना टोला निवासी रामफल बेदिया के एक बैल की मौत हो गई है. वहीं दूसरा बैल भी बीमारी की चपेट में है.
बढ़ता जा रहा लंपी का प्रकोप
बरवा टोला निवासी मंशा बेदिया के पशु की मौत भी लंपी वायरस के कारण होने की चर्चा है. यही नहीं, सांकी, पाली और सुद्दी में भी वायरस की दस्तक से ग्रामीण भयभीत हैं. वायरस से अंजान कई लोग पशुओं की मौत को गंभीरता से नहीं ले रहे. इसकी वजह से लंपी का प्रकोप दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है. हालांकि आपकी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में लंपी वायरस की जानकारी दी जाती है, लेकिन अफसोस कार्यक्रम के शोर और योजनाओं की बौछार में ग्रामीण काम की बात नहीं सुन और समझ पाते हैं. वहीं कार्यक्रम में आये ज्यादातर प्रशिक्षण पदाधिकारी केवल ड्यूटी के लिए बैठकर टाईम पास करते हैं, बजाये जागरूकता फैलाने के. लंपी वायरस का प्रमुख लक्षण पशु को बुखार आना, वजन में कमी, आंखों से पानी टपकना, लार बहना, शरीर पर दाने निकलना, दूध कम देना और भूख नहीं लगाना है. इसके साथ ही पशु का शरीर दिन प्रतिदिन और खराब होते जाना और शरीर पर निकले दाने घाव में बदलने लगते हैं.
लक्षण के आधार पर होता है इलाज
मामले को लेकर पशुपालन पदाधिकारी डॉ पंकज कुमार ने बताया कि भुरकुंडा और भदानीनगर क्षेत्र में लंपी वायरस के मामले आए हैं. वायरस से निपटने के लिए एक ओर जहां बीमार पशुओं का इलाज किया जा रहा है, वहीं स्वस्थ पशुओं को बचाव के लिए टीका लगाया जा रहा है. डॉ पंकज ने बताया कि लंपी त्वचा रोग है, जिसका इलाज लक्षण के आधार पर किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि लंपी वायरस के लक्षण दिखते ही वे नजदीकी पशुपालन पदाधिकारी से संपर्क कर अपने पशु की जान बचा सकते हैं. उन्होंने बताया बीमार पशुओं के संपर्क में आने से बीमारी फैल रही है. इसलिए ग्रामीण फिलहाल पशुओं को खुले में छोड़ने से परहेज करें. मक्खी और मच्छर वायरस फैला रहे हैं, इसलिए साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें.
उपभोक्ता डर से दूध लेने में कर रहे संकोच
वही दूसरी ओर पशुपालकों को अपने जानवर को बचाने का डर सता रहा है, तो दूसरी ओर दूध की खपत कहीं कम न हो जाये. ये चिंता का सबक होता मालूम पड़ रहा है अगर वैसी परिस्थिति आती है तो आखिरकार दो-दो परेशानियों से कैसे खुद और परिवार के जीविकोपार्जन को संभाला जाये. ये बहुत ही गंभीर चिंता का विषय है.
रिपोर्ट: जयंत कुमार, रामगढ़/भुरकुंडा
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