धनबाद में लाल झंडे ने सांसद ढुल्लू महतो की साख पर कैसे लगाया बट्टा,पढ़िए इस रिपोर्ट में 

    धनबाद में लाल झंडे ने सांसद ढुल्लू महतो की साख पर कैसे लगाया बट्टा,पढ़िए इस रिपोर्ट में

    धनबाद(DHANBAD): 2019 में भी झारखंड में भाजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं था.  फिर भी धनबाद लोकसभा की 6 सीटों में पांच पर भाजपा का कब्जा हुआ था.  लेकिन 2024 के चुनाव ने भाजपा को धनबाद लोकसभा में भी बड़ा झटका दे दिया है. लाल झंडे ने दो सीटें झटक ली है. भाजपा के खाते में केवल  दो सीट  ही आई है.  यह  दोनों सीट  भी पार्टी की वजह से अथवा उम्मीदवारों के व्यक्तिगत प्रयास और छवि के कारण आई, इसकी तो आगे समीक्षा होगी.  लेकिन इतना तो तय है कि धनबाद लोकसभा में भाजपा की करारी हार हुई है.  चंदनकियारी सीट से नेता प्रतिपक्ष रहे अमर कुमार बाउरी  चुनाव हार गए है.  तो निरसा  एवं सिंदरी में भी भाजपा को हार  का मुंह देखना पड़ा है.  यह  अलग बात है कि झरिया सीट  ने इस बार कांग्रेस को नहीं स्वीकार किया  और वहां से भाजपा की रागिनी सिंह विजई रही.  

    2019 के चुनाव में धनबाद लोकसभा की 6 सीटों में पांच पर भाजपा का कब्जा हुआ था

    जबकि 2019 के चुनाव में धनबाद लोकसभा की  6 सीटों में पांच पर भाजपा का कब्जा हुआ था. यह  सीट  थी निरसा, सिंदरी, धनबाद, चंदनकियारी और बोकारो.  केवल झरिया सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी.  लेकिन इस बार झरिया के बजाय कांग्रेस बोकारो सीट  जीती है.  दूसरी ओर भाजपा को तीन सीटों का नुकसान हुआ है.  वैसे धनबाद जिले की बात अगर की जाए तो भाजपा को तीन सीट मिली है, जबकि इंडिया गठबंधन को भी तीन सीट ही मिली है.  यह अलग बात है कि चुनाव घोषणा के पहले भाजपा महानगर और ग्रामीण जिला अध्यक्षों की घोषणा के बाद विवाद हुआ था.  लेकिन चुनाव को नजदीक देखते हुए प्रदेश नेतृत्व इस पर कार्रवाई के बजाय मामले को ठंडा करने में ज्यादा ध्यान दिया.  अब धनबाद लोकसभा के विधान सभा सीटों  पर भाजपा की क्यों करारी हार हुई, इसकी समीक्षा की जाएगी. 

    झारखंड में झामुमो, राजद और माले ने अपना विस्तार किया है

    झारखंड में झामुमो, राजद और माले ने अपना विस्तार किया है. तो कांग्रेस 2019 के रिकॉर्ड तक केवल पहुंच पाई है. चौंकाने वाले रिजल्ट तो झारखंड के हर कोने से आए हैं. लेकिन संथाल परगना में 18 सीटों में से 17 सीट इंडिया ब्लॉक के पास चली गई है. सिर्फ एक सीट पर भाजपा की जीत हुई है. इससे भी बड़ी बात है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा छोड़कर भाजपा में गई सीता सोरेन भी चुनाव हार गई है. लोबिन  हेंब्रम भी चुनाव हार गए हैं. वैसे संथाल परगना विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से दूसरा सबसे बड़ा प्रमंडल है. इसे झामुमो का गढ़ भी माना जाता है. झारखंड मुक्ति मोर्चा ने संथाल परगना से 11 सीट जीतकर यह बता दिया है कि उसका जलवा अभी संथाल परगना में बरकरार है. भाजपा को एकमात्र जरमुंडी विधानसभा सीट पर ही जीत हासिल हो पाई. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो



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