TNP DESK: रांची विश्वविद्यालय के टीआरएल विभाग के कुछ छात्र नाराज हैं. उनका यह कहना है कि पीएचडी में ऐडमिशन लेने के लिए उन्हें गाइड और मौका नहीं मिल पा रहा है, जबकि दूसरे विश्वविद्यालयों से आने वाले छात्रों को आसानी से एडमिशन मिल रहा है. इसी बात के विरोध में छात्रों ने विभाग में धरना और प्रदर्शन किया हैं.
नेट और जेआरएफ उत्तीर्ण शोधार्थियों का कहना है कि उन्हें पीएचडी के लिए शोध निर्देशक (गाइड) नहीं मिल पा रहे हैं. कई छात्र-छात्राएं पिछले कई वर्षों से विभाग के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उनका शोध कार्य शुरू नहीं हो सका. छात्रों का आरोप है कि विभाग में सीटें भरी होने की बात कहकर उन्हें मना कर दिया जाता है, जबकि अन्य विश्वविद्यालयों से आने वाले उम्मीदवारों को आसानी से प्रवेश मिल जाता है.
शोधार्थियों का कहना है कि रांची विश्वविद्यालय के छात्रों को पीएचडी प्रवेश में प्राथमिकता दी जानी चाहिए. उनका दावा है कि टीआरएल विभाग के कई विषयों में 40 से 80 प्रतिशत तक शोधार्थी दूसरे विश्वविद्यालयों से हैं.
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर यूजीसी नियमों की अनदेखी का भी आरोप लगाया. उनका कहना है कि नियमानुसार एक असिस्टेंट प्रोफेसर एक समय में अधिकतम चार शोधार्थियों का मार्गदर्शन कर सकता है, लेकिन विभाग में यह संख्या बढ़ाकर आठ तक कर दी गई है.
शोधार्थियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. उनका कहना है कि यदि प्रवेश प्रक्रिया और गाइड आवंटन की जांच हो, तो बड़े स्तर पर शैक्षणिक अनियमितताएं सामने आ सकती हैं.
शोधार्थियों की परेशानी
तनु कुमारी ने बताया कि उन्होंने 2023 में नेट परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन तीन साल बीतने के बाद भी उन्हें शोध निर्देशक नहीं मिला.
प्रिया ठाकुर का कहना है कि उन्होंने 2022 में नेट क्वालीफाई किया था. गाइड नहीं मिलने के कारण उन्होंने 2025 में दोबारा जेआरएफ परीक्षा पास की, लेकिन अब तक उनका रिसर्च कार्य शुरू नहीं हो पाया.
राजेश मुंडा ने आरोप लगाया कि 2023 में यूजीसी नेट पास करने और आवेदन देने के बावजूद उन्हें गाइड नहीं मिला, जबकि बाद में आवेदन करने वाले दूसरे विश्वविद्यालयों के छात्रों को प्रवेश दे दिया गया.

