राज्य सभा चुनाव: झारखंड की दूसरी सीट की चाभी कैसे रहेगी बिहार के पास, पढ़िए विस्तार से

    राज्य सभा चुनाव: झारखंड की दूसरी सीट की चाभी कैसे रहेगी बिहार के पास, पढ़िए विस्तार से

    TNP DESK- झारखंड में राज्यसभा चुनाव हो रहा है,  एक सीट पर तो कोई कंफ्यूजन नहीं है, लेकिन दूसरी सीट की चाबी बिहार के पास रहेगी।  इस चाबी को पाने  के लिए झामुमो , कांग्रेस सहित गठबंधन के दलों को तेजस्वी यादव का समर्थन लेना होगा।  यह  अलग बात है कि अभी तक उम्मीदवारों के नाम तय नहीं हुए हैं, लेकिन इतना तो तय है कि एक सीट जहां झामुमो  अकेले अपने दम पर निकाल लेगा , लेकिन दूसरी सीट में पेंच  फंसेगी।  बड़ी बात यह है कि भाजपा ने भी संख्या बल नहीं होने के बावजूद उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है.  भाजपा की यह सोच है कि ऐसे उम्मीदवार को मैदान में उतारा  जाए, जो अपने बलबूते भी समर्थन जुटा सके.  

    कांग्रेस ने भी अपना दावा ठोंक दिया है 

    गठबंधन में कांग्रेस ने भी अपना दावा ठोक दिया है.  कांग्रेस चाहती है कि राज्यसभा चुनाव में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अभियान का नेतृत्व करें और कांग्रेस के उम्मीदवार को जिताने में मदद करें।  हालांकि शुक्रवार को बैठक में कोई निर्णय नहीं हुआ है.  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दो-तीन दिनों का समय मांगा है.  इसके लिए झारखंड प्रभारी, तेलंगाना के डिप्टी सीएम रांची पहुंचे हुए थे और मुख्यमंत्री से मुलाकात की है.  इधर, सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के 2-3 नेता राज्यसभा के लिए अपनी  दावेदारी कर दी ही.  इधर, दूसरी सीट के लिए राजद  के चार  वोट महत्वपूर्ण होंगे और यह चार सीट तेजस्वी यादव के पास है.  राजद  ने अभी तक पत्ता  नहीं खोला है.  माले  के भी दो विधायक हैं, माले  आगे क्या करेगा, बैठक में क्या तय होगा, यह आने वाले वक्त में क्लियर हो सकेगा।  

    दूसरी सीट के लिए राजद और माले का समर्थन जरुरी है 

    यह बात भी सच है की दूसरी सीट के लिए राजद और माले  के बिना महागठबंधन की जीत संभव नहीं है. उल्लेखनीय है कि राज्यसभा चुनाव में "हॉर्स ट्रेडिंग" के लिए झारखंड कुख्यात रहा है.  चाहे 2012 का मामला हो अथवा 2016 का, झारखंड हमेशा से चर्चा में रहा है. .  जानकार सूत्रों के अनुसार 2016 में संख्या बल की  कमी के बावजूद भाजपा के दूसरे उम्मीदवार की जीत हुई थी और इस जीत ने विवादों को जन्म दिया था.  झारखंड में दो सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना है.  इसके बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखकर "हॉर्स ट्रेडिंग" की आशंका जताई है.  झामुमो  की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि गठबंधन के पास दोनों सीट जीतने के लिए पर्याप्त विधायक हैं ,जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन( एनडीए) के पास संख्या बल कम है.



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