रागी मिशन बदल रहा है गुमला की महिलाओं की तकदीर! मडुआ उत्पादन से आर्थिक रुप से मजबूत बन रही हैं महिलाएं

    रागी मिशन बदल रहा है गुमला की महिलाओं की तकदीर! मडुआ उत्पादन से आर्थिक रुप से मजबूत बन रही हैं महिलाएं

    गुमला(GUMLA):गुमला जिला में इन दोनों रागी मिशन अभियान से कई महिलाओं की तस्वीर और तकदीर बदलती हुई नजर आ रही है. जिला प्रशासन और राज्य सरकार की पहल के बाद जिले में रागी मिशन के तहत मडुआ का उत्पादन किया जा रहा है. जिसके माध्यम से महिलाओं को रोजगार के साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत होने का भी एक बेहतर अवसर मिला है. वहीं इसके साथ ही इलाके से महिलाओं के पलायन पर भी रोक लगी है.

    रागी मिशन अभियान के तहत महिलाओं को मिला रहा है सीधा लाभ

    आपको बताये कि गुमला जिला में ग्रामीणों की ओर से केवल धान की खेती की जाती थी, जिसकी वजह से उन्हें आर्थिक रूप से उतना लाभ नहीं मिल पाता था, जितना उनके आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है. इस बात को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन और कृषि विभाग के माध्यम से जिले में बड़े पैमाने पर मडुआ का उत्पादन शुरू किया गया, उसके बाद रागी मिशन अभियान के तहत मडुआ के विभिन्न सामानों का उत्पादन कार्य शुरू किया गया है. जिसका सीधा लाभ स्थानीय लेवल पर महिलाओं को मिलता हुआ नजर आ रहा है. जिला प्रशासन की ओर से इसके लिए बाजार समिति परिसर में एक बड़ा सा परिसर उपलब्ध कराया गया है जहां पर दर्जनों महिलाएं मिलकर मडुआ के विभिन्न सामानों का निर्माण कर रही है.

    मडुआ से लड्डू, मिक्सर सहित कई सामानों का निर्माण करवाया जा रहा है

     वहीं उत्पाद किये गये मडुआ से लड्डू और मिक्सर सहित कई सामानों का निर्माण करवाया जा रहा है, और यह सामान स्थानीय बाजार के साथ ही बाहर में भी बिक्री के लिए भेजा जा रहा है. जिससे करोड़ों का राजस्व भी जिला प्रशासन को प्राप्त हो रहा है. साथ ही इससे जुड़ी महिलाओं को अच्छी खासी कमाई हो रही है. महिलाओं ने बताया कि पहले केवल धान की खेती करने के बाद वह लोग या तो पलायन कर जाते थे या फिर गांव घर में ही बैठकर अपना समय बिताते थे, लेकिन प्रशासन की ओर से मिले प्रशिक्षण और जानकारी के बाद बड़े पैमाने पर अपनी बेकार पड़ी जमीनों पर मडुआ की खेती कर रहे हैं और उसका विभिन्न तरह का सामान बनाकर बाजार में बेचकर अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं.महिलाओं ने यह बताया कि जिले में रोजगार का कोई बेहतर विकल्प नहीं होने की वजह से वे लोग पलायन करने को मजबूर थी, लेकिन जब से ये लोग इस अभियान से जुड़ी है, उनकी आर्थिक स्थिति तो मजबूत हो ही रही है साथ ही उन्हें अच्छी खासी कमाई भी हो रही है. जिससे उनके परिवार का जीवन स्तर भी बेहतर हो रहा है.

    झारखंड के साथ दूसरे राज्यों में भी मडुवा उत्पादन की अच्छी खासी कीमत मिल रही है

    आपको बताये कि एक समय था जब मडुआ को गरीबों का भोजन कहा जाता था, लेकिन आज के समय में जब लोगों को मडुवा से मिलने वाले पौष्टिकता की जानकारी हुई तब से लोगों ने इसे अहमियत दी है, इसके उत्पाद को सीधे भोजन के रूप में ग्रहण करके अपने शरीर को फिट रखने का काम कर रहे हैं. यही वजह है कि मडुआ की डिमांड बाजार में अधिक से अधिक होने लगी है. झारखंड के साथ दूसरे राज्यों में भी इसके उत्पादन की अच्छी खासी कीमत मिल रही है. जिला प्रशासन और  जेएसएलपीएस द्वारा संचालित केंद्र के प्रभारी राहुल कुमार की माने तो उन लोगों के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादित मडुआ को लाकर उसकी पिसाई करके विभिन्न तरह के सामानों का निर्माण करवाया जा रहा है इसके बाद उसे स्थानीय बाजार सहित बाहर के बाजारों में ले जाकर बेचकर राशि कमाई जा रही है और उसका लाभ सीधे महिलाओं के बीच में वितरित किया जाता है. आज के समय में काफी संख्या में महिलाएं इस रोजगार से जुड़कर अपने परिवार की स्थिति को बेहतर बनाने में लगी हुई है.

    महिलाओं को घर बैठे मिल रहा है रोजगार

     वहीं महिलाओं ने कहा कि अब उन्हें गांव घर में ही रहकर बेहतर रोजगार का अवसर मिल गया है, ऐसे में उनका जीवन अब अच्छे से चल रहा है, आनेवाले दिनों में और अधिक से अधिक जमीन पर मडुआ की खेती करने के लिए लोगों को प्रेरित करेंगे, ताकि यहां के स्थानीय ग्रामीणों को आर्थिक रूप से लाभ हो सके जिला प्रशासन की ओर से 2000 एकड़ भूमि पर मडुवा की खेती का लक्ष्य रखा गया है, जिससे सैकड़ो परिवारों को सीधा लाभ मिल पाएगा. जिला प्रशासन की ओर से की जा रही इस पहल से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं में काफी खुशी का माहौल देखने को मिल रहा है.

    रिपोर्ट-सुशील कुमार


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