एक महीने के भीतर धनबाद आ सकते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ,जानिए क्या है उनकी  शर्त 

    एक महीने के भीतर धनबाद आ सकते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ,जानिए क्या है उनकी  शर्त 

    धनबाद(DHANBAD): सब कुछ अगर ठीक-ठाक रहा तो एक  महीने के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धनबाद आ सकते है. शर्त यही है कि हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड(हर्ल)  का सिंदरी कारखाना पूरी क्षमता के साथ उत्पादन शुरू कर ले.  प्रबंधन सूत्रों के अनुसार कारखाना फिलहाल 70% उत्पादन कर रहा है और लगभग एक  महीने के भीतर यह अपने 100 फीसदी  उत्पादन लक्ष्य को हासिल कर लेगा. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन कर सकते है. भीतर ही भीतर उद्घाटन की तिथि तय करने और प्रधानमंत्री से समय लेने के प्रयास शुरू हो गए है. हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड  कारखाना 7 नवंबर' 2022 से उत्पादन शुरू किया. लेकिन तकनीकी कारणों और धरना प्रदर्शन की वजह से उत्पादन बंद कर देना पड़ा. फिर 8 जनवरी '2023 से कारखाने से उत्पादन शुरू हुआ.  

    अन्य प्रदेशों में भी यूरिया की सप्लाई शुरू हो गई है 

    फिलहाल झारखंड, बिहार सहित देश के अन्य राज्यों में नीम कोटेड यूरिया की आपूर्ति शुरू हो गई है.  3850 टन प्रतिदिन यूरिया और 2250 मिलियन टन  अमोनिया प्रतिदिन उत्पादन का लक्ष्य है. सिंदरी खाद कारखाना की शुरुआत 2 मार्च 195 1 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था. उन्होंने कहा था कि यह उनका ड्रीम प्रोजेक्ट है. बंगाल में अकाल पड़ने के कारण अंग्रेजों के समय ही इस कारखाना की स्थापना की बात तय हुई थी. उसके बाद 2 मार्च 195 1 को प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के हाथों इसका उद्घाटन हुआ. कारखाना भी व्यवस्थित ढंग से चला और पूरे देश में खाद की आपूर्ति होने लगी.  

    31 दिसंबर 2002 को हमेशा के लिए  बंद कर दिया गया था कारखाना 

    धीरे-धीरे कारखाने की आर्थिक दशा बिगड़ने लगी और 31 दिसंबर 2002 को इस कारखाने को हमेशा के लिए  बंद कर दिया गया.  बंद होने के बाद 25 मई 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलियापुर हवाई पट्टी से इसका ऑनलाइन शिलान्यास किया था. काम तो बहुत पहले ही पूरा कर लेने का लक्ष्य था लेकिन कोबिड  के कारण विलंब होता चला गया. अंततः 7 नवंबर 2022 से कारखाने से उत्पादन शुरू हुआ. कारखाना चालू होने से लोगों को एक बार फिर नई उम्मीद जगी लेकिन अभी भी कारखाना दक्ष लोगों की कमी झेल रहा है. नौकरी के लिए आंदोलन तो खूब हो रहे हैं लेकिन प्रबंधन को अनुभवी एवं दक्ष लोग  नहीं मिल रहे है. इस वजह से भी काम में कहीं ना कहीं अड़चन आ रही है. देखना है प्रबंधन एक महीने के भीतर किस तिथि को अपना 100 फ़ीसदी उत्पादन लक्ष्य पूरा कर लेता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों इसका उद्घाटन होता है.


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