बिजली संकट : जेनेरेटर के भरोसे जिंदगी ! धनबाद के माथे पर महिषासुर का हाथ !!

    बिजली संकट : जेनेरेटर के भरोसे जिंदगी ! धनबाद के माथे पर महिषासुर का हाथ !!

    धनबाद(DHANBAD): बाघमारा के मधुबन थाना  के समीप शनिवार को बिजली को लेकर दो पक्षों के बीच हुई खूनी  झड़प के मामले में पुलिस की कार्रवाई तेज है. 15 नामजद  सहित 300 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया गया है. बलियापुर में बिजली  बहाल करने के लिए रविवार को ग्रामीणों ने बलियापुर- सिंदरी मुख्य मार्ग को हवाई पट्टी के समीप जाम कर दिया. आक्रोशित गांव वाले बिजली विभाग को जमकर कोस  रहे थे. यह  तो सिर्फ दो उदाहरण है. बिजली संकट से धनबाद जिला तंग -तबाह  है. धनबाद में बिजली 14 से 15 घंटे कट रही है. उद्योग चलाने वाले तबाह है, कारोबार करने वाले परेशान हैं, आम लोग तो भगवान- भगवान कहकर  दिन और रात काट रहे है. यह जानकर सबको आश्चर्य होगा कि पेट्रोल पंप में जनरेटर के लिए डीजल की खपत काफी बढ़ गई है. यह खपत  आम दिनों की अपेक्षा डेढ़ गुनी  से दोगुनी हो गई है. मतलब साफ है कि जनरेटर के भरोसे लोगों का जीवन चल रहा है. कारोबार चल रहा है, लोगों के घर रोशन हो रहे है. 

     यह हाल कब तक बना  रहेगा , कोई कह नहीं सकता

     यह हाल कब तक बना  रहेगा , कोई कह नहीं सकता है. धनबाद की बिजली ऐसी हो गई है, जो ना गर्मी झेल  पाती है और न बरसात. गर्मी चढ़ी नहीं कि  बिजली व्यवस्था धराशाई हो जाती है. पत्ता खड़का  नहीं कि  बिजली गायब हो जाती है. यह क्रम  पिछले एक सप्ताह से चल रहा है. बिजली नहीं रहने से पानी संकट भी पैदा हो गया है. हाय बिजली- हाय  बिजली, हाय पानी -हाय  पानी रट लगाते  हुए  लोग दिन और रात काट रहे है. घरों के इनवर्टर तो किसी भी दिन काम नहीं करते. बैटरी चार्ज होगी , नहीं तो इनवर्टर चलेंगे कैसे. दावा किया गया था कि चुनाव के समय बिजली लोगों को निर्वाध  मिलेगी लेकिन, परिणाम इसके उलट हुआ. यह  अलग बात है कि बिजली विभाग के पास बड़ी फौज है, लेकिन वह फौज भी कहीं ना कहीं लाचार दिख रही है. जनरेटर चलने से कोयलांचल का प्रदूषण भी बढ़ गया है. सरकार की ओर से प्रदूषण नियंत्रण के लिए उपाय किए जा रहे हैं ,लेकिन जनरेटर के धुएं  में यह उपाय उड़ जा रहे है. लोगों को थोड़ी भी राहत नहीं मिल रही है. 

    कोयले की राजधानी में बिजली संकट 

     धनबाद कोयलांचल  कोयले की राजधानी है. यहां का कोयला दूसरे प्रदेशों में जाता है. यहां के कोयले से दूसरे प्रदेश रोशन होते हैं ,लेकिन धनबाद खुद बिजली संकट झेलता है. आवाम की आवाज कहीं सुनी  नहीं जा रही है. बिजली के आने में जो भी देर लगती हो, जाने में कोई विलंब नहीं होता. झारखंड के लोगो ने  भाजपा का भी शासन देखा ,  फिलहाल झारखंड मुक्ति मोर्चा की अगुवाई में गठबंधन की सरकार को भी देख रहे है. न भाजपा सरकार में राहत मिली और ना गठबंधन सरकार में राहत मिल रही है. आगे भगवान ही मालिक है. जरा अंदाजा करिये घर के  बाहर तेज धूप हो और घर के भीतर बिजली कटी हो, वह भी आधे घंटे से नहीं बल्कि कई घंटे से. इस हालत में घर का इनवर्टर फेल  कर गया हो और घर में छोटे-छोटे बच्चे हो, तो फिर उस परिवार की क्या हालत हो रही होगी , इसका सिर्फ अंदाज ही लगाया जा सकता है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 



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