रांची (RANCHI): राजधानी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद ने भाजपा के “महिला हितैषी” दावे पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के नाम पर राजनीतिक लाभ लेने के लिए भ्रम फैलाया जा रहा है और संविधान की गलत व्याख्या की जा रही है.
कांग्रेस भवन में हुई इस प्रेस वार्ता में महिला कांग्रेस की कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहीं. अंबा प्रसाद ने कहा कि महिला आरक्षण को लेकर जो प्रचार किया जा रहा है, वह वास्तविकता से अलग है. उनके मुताबिक, वर्ष 2023 में पारित संशोधन के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण पहले ही संवैधानिक रूप से शामिल किया जा चुका है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान में जोड़े गए प्रावधान, अनुच्छेद 330A, 332A और 334A, पहले से ही इस आरक्षण का आधार तय करते हैं. खासतौर पर अनुच्छेद 334A में यह उल्लेख है कि यह व्यवस्था जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू होगी. ऐसे में इस विषय पर दोबारा बिल लाने या इसे नए रूप में पेश करने को उन्होंने “भ्रम पैदा करने की कोशिश” बताया. अंबा प्रसाद ने यह भी सवाल उठाया कि चुनावी माहौल के बीच विशेष सत्र बुलाकर इस मुद्दे को उठाने की आवश्यकता क्यों पड़ी. उनके अनुसार, यह किसी राष्ट्रीय या राजनीतिक संकट की स्थिति नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है.
उन्होंने आरोप लगाया कि आम लोगों, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है. उनका कहना था कि जानकारी के अभाव का फायदा उठाकर गलत संदेश फैलाया जा रहा है. इसके खिलाफ कांग्रेस अब “संविधान जागरूकता अभियान” चलाने की तैयारी में है, ताकि लोगों तक सही जानकारी पहुंचाई जा सके.
अपने संबोधन में उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि वह तथ्यों के आधार पर जानकारी साझा करे और संविधान से जुड़े मुद्दों पर जिम्मेदारी निभाए. साथ ही, उन्होंने कहा कि महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर वास्तविक संवेदनशीलता और पारदर्शिता जरूरी है, न कि केवल चुनावी वादे. कांग्रेस ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि जनता को तथ्यों से अवगत कराया जा सके और किसी भी तरह के भ्रम को दूर किया जा सके.

