पेट्रोल पंप हटा ,खनिक की मूर्ति बैठी लेकिन जाम से नहीं मिला छुटकारा ,जानिए पूरा डिटेल्स


धनबाद(DHANBAD): धनबाद का रांगाटांड़ चौक और बगल में गया पुल अंडर पास. रोज यह अंडर पास दो लाख से भी अधिक वाहनों को अपनी छत के नीचे से गुजारता है. इस जगह को श्रमिक चौक भी कहा जाता है. सड़क जाम के लिए बदनाम है यह चौक. गया पुल अंडरपास को चौड़ा करने की प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन यह उलझनों में उलझती रही. इ धर, गया पुल में बनने वाले नए अंडरपास की डीपीआर पथ निर्माण विभाग को सौंप दी गई है. राइट्स कंपनी ने नए अंडरपास के लिए 23 करोड़ 75 लाख का बजट निर्धारित किया है. पथ निर्माण विभाग ने इसकी तकनीकी स्वीकृति के लिए पथ निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर (ट्रैफिक) को भेजा है. देखना है आगे क्या होता है और लोगों को कब राहत मिलती है. वैसे रंगाटांड श्रमिक चौक के बारे में यही कहा जाता है कि मर्ज बढ़ता गया, ज्यों -ज्यों दवा की, की तर्ज पर समस्या सुधरी ,बिगड़ी और बिगड़ती चली गई.
1982 तक खनिक मूर्ति की जगह खड़ा था पेट्रोल पंप
1982 का वह समय रहा होगा, जिस जगह पर आज खनिक की मूर्ति खड़ी है ,वही पेट्रोल पंप हुआ करता था. पेट्रोल पंप का नाम खेंगर जी बताया जाता है. पेट्रोल पंप होने की पुष्टि पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह और पूर्व वार्ड आयुक्त विपिन कुमार अग्रवाल ने भी की है. उस समय धनबाद के उपायुक्त थे जेएस बरारा. जाम की समस्या जब विकराल हुई तो उपाय खोजै जाने लगा. पुल के नीचे सड़क ऊंची थी, ऊपर तो रेल लाइन थी, इस वजह से पुल होकर गुजरने पर वाहन फंस जाते थे और घंटों जाम लग जाता था. पंप के कारण नीचे की जमीन गहरी नहीं हो पा रही थी, क्योंकि ऊपर तो रेल लाइन से छेड़छाड़ संभव नहीं था. पंप को शिफ्ट कर जमीन गहरी करने का निर्णय हुआ. अब इंजीनियरिंग की समस्या खड़ी हुई, झारखंड के इंजीनियर इन चीफ के पद से अवकाश लेने वाले कर्मठ अधिकारी (अब स्वर्गीय) सी के सिंह उस समय जापान से ट्रेनिंग लेकर आए थे. जिला परिषद के जिला अभियंता थे. इस काम को करने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई.
और बन गया त्रिकोण डिजाइनदार चौराहा
कार्य को उन्होंने सफलतापूर्वक पूरा कराया और वहां एक त्रिकोण डिजाइनदार चौराहा बनकर तैयार हो गया. उस समय धनबाद में माफिया उन्मूलन अभियान चल रहा था, मदन मोहन झा यहां के डीसी थे. पंडित बिंदेश्वरी दुबे बिहार के सीएम बन चुके थे. माफिया के हाथों से कोलियारियो का ठेका- पट्टा लेकर सहकारी समितियों को दे दिया गया था. जगह-जगह कोयला खनिको का उत्साह बढ़ाने के लिए उनके सम्मान की परिपाटी शुरू हो गई थी. इसी समय रांगाटांड़ में खनिक की प्रतिमा लगाई गई. पंडित बिंदेश्वरी दुबे ने इसका अनावरण किया था. आज भी वहां जाम की महा समस्या है, जो जो उपाय किए गए, वाहनों की संख्या के अनुपात में वह कमजोर पड़ गए. और चार दशकों से लो जाम की समस्या झेल रहे हैं और विभाग और सरकार पेपर -पेपर का खेल रहे है.
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