झारखंड में छात्रों और युवाओं का भविष्य अधर में लटका,नामांकन और नौकरी दोनों में रोड़ा बना प्रमाण पत्र  

    झारखंड में छात्रों और युवाओं का भविष्य अधर में लटका,नामांकन और नौकरी दोनों में रोड़ा बना प्रमाण पत्र  

    रांची(RANCHI): झारखंड में शिक्षा विभाग ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिया कि प्रज्ञा केंद्रों के माध्यम से छात्रों का जाति प्रमाण पत्र बनवायें. शिक्षा विभाग के निर्देशों का अनुपालन भी किया जा रहा है. लेकिन इस कैंप में सिर्फ पैसों की बर्बादी हो रही है. क्योंकि राज्य के सभी राजस्व कर्मचारी 16 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. राजस्व कर्मचारी के हड़ताल पर रहने की वजह से प्रमाण पत्र बनाने समेत कई काम अंचल कार्यालय से बाधित है. मानो सरकार को खुद नहीं पता की उनके कर्मचारी काम पर है या नहीं है.

    राजस्व कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने से अंचल कार्यालय का काम पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है. जाति  प्रमाण पत्र के लंबित आवेदनों की संख्या 20 लाख के पार पहुंच गई है. लेकिन अब भी किसी ने राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल पर विचार नहीं किया. ना ही इन लंबित आवेदनों के निबटारा के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई. जब काम पर राजस्व कर्मचारी वापस भी लौट जाएंगे तो एक बड़ी समस्या लंबित आवेदनों का निबटारा करने में होगी.

    छात्र को नौकरी और नामांकन दोनों में जरूरी है प्रमाण पत्र

    छात्र अगर किसी सरकारी स्कूल में नामांकन कराते हैं तो उन्हें जाति और आवासीय प्रमाण पत्र जरूरी होता है. अगर किसी कॉलेज में छात्र वृति का आवेदन करना चाहे तो बिना प्रमाण पत्र के नहीं होगा.ऐसे में छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है. इनकी सुनने वाला कोई नहीं है. वहीं अगर नौकरी के लिए आवेदन करना चाह रहे हैं तो उसमें भी प्रमाण पत्र बड़ी समस्या बना हुआ है. हाल में ही झारखंड में दरोगा के लिए बहाली निकली है उसमें भी प्रमाण पत्र जरूरी होगा. ऐसे में छात्र से लेकर नौकरी के लिए आवेदन करने वाले लोगों में निराशा देखी जा रही है.        

    सिर्फ प्रमाण पत्र ही नहीं मोटेशन का भी काम लंबित

    कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से जमीन संबंधित भी परेशानी बढ़ने लगी है. चाहे वह लगान रशीद हो या फिर मोटेशन सभी काम लंबित है.राज्य में भी यह आकडा लाखों में पहुँचने वाला है. जमीन बिक्री के बाद मोटेशन जरूरी होता है लेकिन आवेदन करने के बाद भी यह पेंडिंग है. इसमें भी राजस्व कर्मचारी ही फाइल को आगे बढ़ाते हैं. हड़ताल के वजह से राज्य के राजस्व को भी नुकसान हो रहा है.    

                   

    जानिए क्या है राजस्व कर्मचारियों की मांग

    2400 व तीन वर्ष बाद 2800 करने,अंचल निरीक्षकों की बहाली पर रोक लगाते हुए 50 प्रतिशत पद पर वरीयता एवं 50 प्रतिशत पदों पर सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर प्रोमोशन,प्रमोशन के लिए राजस्व कर्मचारी का कार्यअवधि पांच वर्ष,राजस्व प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने,लेप टॉप व नेट मुहैया कराने,हल्का ईकाई का पुर्नगठन करने,दो पहिया वाहन का ईंधन खर्च,सुरक्षा मुहैया कराने,राजस्व कर्मचारी के रिक्त पदों पर बहाली,सभी को पुरानी पेंशन लागू करने की मांग शामिल है.


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