अभिभावकों की टूटने लगी कमर : प्राइवेट स्कूलों और पुस्तक प्रकाशकों के इस रिश्ते को क्या नाम दिया जाए

    प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ झारखंड अभिभावक महासंघ ने मोर्चा खोल दिया है. प्रत्येक साल पाठ्यक्रम की  पुस्तकों मे दो-तीन चैप्टर बदलकर बच्चों एवं अभिभावकों को पूरा पुस्तक का सेट खरीदने को मजबूर किया जाता है

    अभिभावकों की टूटने लगी कमर : प्राइवेट स्कूलों और पुस्तक प्रकाशकों के इस रिश्ते को क्या नाम दिया जाए

    धनबाद(DHANBAD) | प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ झारखंड अभिभावक महासंघ ने मोर्चा खोल दिया है.  स्कूलों द्वारा री एडमिशन चार्ज के बदले अन्य -अन्य नाम से राशि वसूल की जा रही है.  अभिभावकों को एक ही दुकान से किताब -कॉपी खरीदने को बाध्य  किया जा रहा है.  अभिभावक परेशान हैं.  किताब से लेकर कॉपी तक के  शुल्क में भारी बढ़ोतरी की गई है.  अभिभावक पेट काटकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं, फिर भी खर्च पूरा नहीं हो रहा है.  बच्चों की पढ़ाई ने घर के बजट पर भारी बोझ डाल दिया है.  ऐसे में अभिभावक चाहते हैं कि सरकार या जिला प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप करे.  देखना होगा कि आगे -आगे इसमें होता है क्या?

    झारखंड अभिभावक महासंघ ने खोला मोर्चा 

    इधर ,झारखंड अभिभावक महासंघ का एक प्रतिनिधिमंडल अध्यक्ष पप्पू सिंह के नेतृत्व में बुधवार को  धनबाद के उप - विकास  आयुक्त सन्नी राज  को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन मे झारखण्ड अभिभावक महासंघ के द्वारा  री -एडमिशन चार्ज को अन्य  नाम से जैसे  बिल्डिंग चार्ज, डेवलपमेंट चार्ज, एनुअल चार्ज, कॉशन मनी आदि के नाम से लेने पर रोक लगाने की मांग की गई.  अध्यक्ष पप्पू सिंह ने कहा कि जिले मे प्राइवेट स्कूलों द्वारा  नियम विरुद्ध निर्धारित शुल्क एवं शुल्क संरचना की अविलम्ब जांच होनी चाहिए।  री एडमिशन को छदम नाम से लिया जा रहा है, इसपर प्रशासन एवं सरकार एक्शन ले.   उप -विकास आयुक्त ने आश्वासन देते हुए सारे मुद्दों  पर सात अप्रैल को एक बैठक अभिभावक महासंघ के साथ बुलाई है.  इस बैठक मे शिक्षा विभाग के वरीय पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। महासचिव मनोज मिश्रा ने कहा कि री एडमिशन के स्थान पर प्राइवेट स्कूलों द्वारा छदम नाम से मोटी रकम  वसूली जा रही है.   इस पर अविलम्ब नकेल सरकार एवं प्रशासन  को कसना चाहिए। 

    प्रत्येक साल पाठ्यक्रम की पुस्तक बदलने का क्या है खेल 

     प्रत्येक साल पाठ्यक्रम की  पुस्तकों मे दो-तीन चैप्टर बदलकर बच्चों एवं अभिभावकों को पूरा पुस्तक का सेट खरीदने को मजबूर किया जाता है, इस पर रोक लगनी चाहिए।  वरीय उपाध्यक्ष मुकेश पाण्डेय ने कहा कि अगर अविलम्ब कारवाई करते हुये अभिभावकों के शोषण बंद नहीं करवाया जाता है, तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन करेगा।  प्राइवेट स्कूलों एवं पुस्तकों के प्रकाशकों  के बीच साठगांठ के कारण अभिभावकों की जेब ढीली हो रही है.  किताबों, स्कूल यूनिफार्मो के शुल्क में  वृद्धि के बोझ तले अभिभावक दब चुके है.   ज्ञापन पत्र सौपनें  में  मिडिया प्रभारी रतिलाल महतो,  कोषाध्य्क्ष प्रेम ठाकुर , उदय प्रताप सिंह, दिलीप सिंह,  जितेंद्र मलाकार  आदि उपस्थित थे. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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