पलामू सांसद विष्णु दयाल राम ने लोकसभा में रखी आंगनबाड़ी सेविकाओं की मांग, मानदेय बढ़ाने का उठाया मुद्दा

    पलामू के सांसद विष्णु दयाल राम ने लोकसभा में आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं से जुड़े अहम मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया. उन्होंने नियम 377 के तहत एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) योजना में कार्यरत आंगनबाड़ी कर्मियों की लंबे समय से लंबित मांगों को सदन के समक्ष रखा.

    पलामू सांसद विष्णु दयाल राम ने लोकसभा में रखी आंगनबाड़ी सेविकाओं की मांग, मानदेय बढ़ाने का उठाया मुद्दा

    पलामू (PALAMU): पलामू के सांसद विष्णु दयाल राम ने लोकसभा में आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं से जुड़े अहम मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया. उन्होंने नियम 377 के तहत एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) योजना में कार्यरत आंगनबाड़ी कर्मियों की लंबे समय से लंबित मांगों को सदन के समक्ष रखा.

    सांसद ने कहा कि आंगनबाड़ी सेविकाएं और सहायिकाएं वर्षों से सेवाओं के नियमितीकरण, मानदेय में उचित बढ़ोतरी और समय पर भुगतान की मांग कर रही हैं. इसके साथ ही पेंशन, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं दिए जाने की भी जरूरत है. उन्होंने यह भी कहा कि इन कर्मियों पर गैर-आईसीडीएस कार्यों और अत्यधिक प्रशासनिक जिम्मेदारियों का बोझ डाला जा रहा है, जिसे कम कर कार्य दायित्वों का युक्तिकरण किया जाना चाहिए.

    विष्णु दयाल राम ने आंगनबाड़ी केंद्रों की जमीनी स्थिति पर भी ध्यान दिलाया. उन्होंने कहा कि कई केंद्रों में आज भी बुनियादी ढांचे और आवश्यक सुविधाओं का अभाव है. इसके अलावा पारदर्शी भर्ती और पदोन्नति प्रक्रिया, नियमित प्रशिक्षण, कार्यस्थल पर सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी लंबे समय से की जा रही है.

    सांसद ने अपने संबोधन में आंगनबाड़ी कर्मियों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी सेविकाएं गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों तक पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक बाल देखभाल सेवाएं पहुंचाने में अग्रिम पंक्ति की भूमिका निभाती हैं. आईसीडीएस योजना की सफलता और मातृ एवं शिशु कल्याण सेवाओं को मजबूत करने के लिए इस कार्यबल का सशक्त और सुरक्षित होना जरूरी है.

    उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के माध्यम से महिला एवं बाल विकास मंत्री, भारत सरकार से आग्रह किया कि आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए ठोस कदम उठाए जाएं. सांसद ने कहा कि यदि इन कर्मियों की समस्याओं का समाधान किया जाता है, तो इसका सीधा लाभ देश की माताओं और बच्चों को मिलेगा.

    लोकसभा में यह मुद्दा उठने के बाद आंगनबाड़ी सेविकाओं की वर्षों पुरानी मांगों पर एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है.


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