अब बदल गई है भाजपा: भाजपा में  आकर इन नेताओं की किस्मत कैसे चमकी ,कैसे पहुंच गए मुख्यमंत्री की कुर्सी तक

    अब बदल गई है भाजपा: भाजपा में  आकर इन नेताओं की किस्मत कैसे चमकी ,कैसे पहुंच गए मुख्यमंत्री की कुर्सी तक

    TNP DESK- भारतीय जनता पार्टी में अब ऊंचा  पद पाने के लिए यह जरूरी नहीं है कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से निकला हुआ व्यक्ति हो.  दूसरे दलों से भाजपा में आने वाले भी प्रमुख पदों तक पहुंच रहे है.  राज्य के मुख्यमंत्री की बागडोर उनके हाथों में दे दी जा रही है.  असम में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने हिमंत  बिस्वा  सरमा  हो अथवा त्रिपुरा में सरकार चला रहे मानिक साह  हो, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी हो या फिर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हों.  

    कांग्रेस,राजद , जदयू और तृणमूल से भाजपा आकर बड़े नेता बने 

    चारों नेता कांग्रेस,राजद , जदयू और तृणमूल कांग्रेस से आकर भाजपा में ताकतवर नेता बन गए है.  यहां तक की मुख्यमंत्री तक में उन्हें तरक्की मिल गई है.  इससे  यह संदेश तो जरूर निकलता है कि भाजपा अब यह  नहीं विचार नहीं  करती कि  वह बाहर का है अथवा भीतर का.  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से आया है या किसी और पार्टी से.  अगर उसमें क्षमता है, तो वह बड़ा नेता बन सकता है.  जानकारी के अनुसार हिमंत  बिस्वा  सरमा कांग्रेस से भाजपा में आए थे और असम के मुख्यमंत्री बने.  उसके बाद मानिक साह  का नंबर आता है. वह भी कांग्रेस से आये थे.  सम्राट चौधरी और सुभेंदु  अधिकारी भी आगे सीएम बन गए.  

    हिमंत  बिस्वा  सरमा  2015 में भाजपा में शामिल हुए

    जानकारी के अनुसार हिमंत  बिस्वा  सरमा  2015 में भाजपा में शामिल हुए.  उन्हें मुख्यमंत्री बनने की इच्छा थी और कांग्रेस सरकार में बन नहीं पा रहे थे.  तो कांग्रेस छोड़ा  और भाजपा में आकर मुख्यमंत्री बन गए.  बिहार में लालू  यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल और जदयू में भी सम्राट चौधरी रहे.  सम्राट चौधरी 2017 में भाजपा में आये.  भाजपा में आने  के बाद सम्राट चौधरी का लगातार कद  बढ़ता रहा और अब वह बिहार के मुख्यमंत्री बन गए हैं.  बंगाल के मुख्यमंत्री सुभेंदु  अधिकारी की बात हो तो  तो 2020 में वह भाजपा में शामिल हुए.  उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।  2021 में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को पराजित किया।  मुख्यमंत्री बनने के लिए ममता बनर्जी को भवानीपुर से उपचुनाव लड़ना पड़ा था.  सुभेंदु  अधिकारी लगातार 5 वर्ष तक ममता की पार्टी पर प्रहार करते रहे.  2026 के चुनाव में ममता बनर्जी को भवानीपुर से भी हराया और नंदीग्राम सीट भी जीत ली.  उसके बाद वह बंगाल के मुख्यमंत्री बन गए है.



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