जमशेदपुर मॉब लिंचिंग केस में नया मोड़: 23 आरोपियों की रिहाई को सरकार ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

    जमशेदपुर मॉब लिंचिंग केस में नया मोड़: 23 आरोपियों की रिहाई को सरकार ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

    जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): जमशेदपुर के चर्चित नागाडीह मॉब लिंचिंग मामले में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है. वर्ष 2017 में बागबेड़ा थाना क्षेत्र के नागाडीह गांव में चार लोगों की पीट-पीटकर हत्या के मामले में निचली अदालत से बरी हुए 23 आरोपियों के खिलाफ राज्य सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. सरकार ने साक्ष्य के अभाव में हुई रिहाई को चुनौती देते हुए मामले की पुनः सुनवाई की मांग की है. यदि हाईकोर्ट इस याचिका पर सुनवाई स्वीकार करता है, तो बरी हुए आरोपियों पर दोबारा कानूनी शिकंजा कस सकता है. इनमें एक आरोपी की मृत्यु हो चुकी है. इससे पीड़ित परिवारों में न्याय की उम्मीद फिर जागी है. मामले के प्राथमिकीकर्ता उत्तम वर्मा ने झारखंड हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को पत्र भेजकर केस की दोबारा सुनवाई कराने की मांग भी की है.

    5 दोषियों को हुई थी उम्रकैद की सजा

    इस मामले में निचली अदालत ने 8 अक्टूबर 2025 को पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. सजायाफ्ता आरोपियों में राजाराम हांसदा, रेंगो पूर्ति, गोपाल हांसदा, सुनील सरदार और तारा मंडल शामिल हैं. हालांकि इनमें से चार दोषियों को हाईकोर्ट से अपील लंबित रहने तक जमानत मिल चुकी है, जबकि एक आरोपी अब भी जेल में बंद है. इस मामले में लंबे समय तक फरार रहने वाले आरोपी डॉक्टर मार्डी ने आठ वर्ष बाद अदालत में आत्मसमर्पण किया था. उसकी जमानत याचिका भी झारखंड हाईकोर्ट से मंजूर हो गई है.

    क्या है घटना 

    घटना 18 मई 2017 की है. जब बच्चा चोरी की अफवाह के बाद नागाडीह गांव में उग्र भीड़ ने चार लोगों को घेर लिया था. लाठी, डंडे और पत्थरों से की गई बेरहमी से पिटाई में जुगसलाई नया बाजार निवासी विकास वर्मा, गौतम वर्मा और गंगेश की मौके पर ही मौत हो गई थी. वहीं, विकास और गौतम की दादी रामसखी देवी गंभीर रूप से घायल हो गई थीं. जिनकी इलाज के दौरान 20 जून 2017 को टाटा मेन हॉस्पिटल में मौत हो गई थी. अब राज्य सरकार की अपील के बाद यह मामला फिर से चर्चा में है. हाईकोर्ट के फैसले पर पीड़ित परिवारों समेत पूरे शहर की नजरें टिकी हैं.



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