New Technology: जमीन के साथ -साथ समंदर को भी खोदने की क्यों चल रही तैयारी, पढ़िए इस रिपोर्ट में 

    New Technology: जमीन के साथ -साथ समंदर को भी खोदने की क्यों चल रही तैयारी, पढ़िए इस रिपोर्ट में 

    धनबाद(DHANBAD): देश में जमीन के साथ-साथ अब समंदर को भी खोदने की तैयारी चल रही है.  धनबाद के डीजीएमस  के  स्थापना दिवस पर एक्सपर्ट्स  ने चौंकाने वाले यह संकेत दिए है.  इसके लिए भारत सरकार नया नियम लाने जा रही है.  समुद्र में खनन के लिए अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम जल्द ही अस्तित्व में आने वाला है.  यह  विधेयक  2023 में लोकसभा में पेश किया गया था .  इसमें  कई संशोधन किए गए है.  यह सब बातें धनबाद के डीजीएमएस   के  स्थापना दिवस में सामने आई है.  इस विधेयक के पारित होने के बाद समुद्री खनन को बढ़ावा मिलेगा.  ऐसा होने से खनन के क्षेत्र में सुरक्षा की  कई नई चुनौतियां सामने आएंगी.  

    आनेवाले दिनों में खनन क्षेत्र का अप्रत्याशित  विस्तार होगा

    खनन क्षेत्र का अप्रत्याशित  विस्तार होगा और डीजीएमएस   की जिम्मेदारियां बढ़ेगी.  यह बात भी सच है कि खनन से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी.  यह भी  बताया गया कि भविष्य में कॉन्टैक्ट खनन  और बढ़ेगा.  इसके लिए ठेका मजदूरो  पर ध्यान केंद्रित करना होगा.  उन्हें प्रशिक्षण देना होगा.  यह बात भी सच है कि खनन क्षेत्र में कॉन्ट्रैक्ट माइनिंग  की प्रथा का विस्तार हुआ है.  देसी नहीं बल्कि विदेश के भी प्राइवेट प्लेयर्स खनन क्षेत्र में प्रवेश किए है.  इस वजह से देश की कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया को भी प्रतियोगिता का सामना करना पड़ेगा.  हालांकि इसके शुरूआती रुझान मिलने शुरू हो गए है.

    अंग्रेजों ने ही शुरू किया था कोयला खनन 
     
    बता दे कि  अंग्रेजों के समय से धनबाद से सटे रानीगंज कोयला क्षेत्र में खनन का काम चल रहा है.   1774 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक अंग्रेजी कंपनी को रानीगंज कोलफील्ड में खनन की अनुमति दी थी.   18 97 में बलूचिस्तान (अब पाकिस्तान) में खान हादसे के बाद खान निरीक्षण की जरूरत महसूस की गई. इसके बाद लगातार दो-तीन बड़े खान हादसों के बाद कोयला खदानों में सुरक्षा कानून को कड़ाई से लागू करने की जरूरत महसूस की गई. उसे लागू करने की पहल शुरू हुई. वैसे, भारत में कोयला खनन का इतिहास 1774 का है. उस समय अंग्रेजी कंपनियां कोयला खनन करती थी. फिलहाल के खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) को लेकर धनबाद की अलग पहचान है. धनबाद में स्थापित डीजीएमएस का भवन सबसे पुरानी विरासत में से एक है. इस भवन में 100 साल से भी अधिक पुराने रिकॉर्ड रूम पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है. वैसे, 1902 में खान निरीक्षण ब्यूरो की स्थापना की गई थी और इसका मुख्यालय कोलकाता में रखा गया था. 1904 में इसका नाम खान विभाग के रूप में किया गया. 

    1908 में धनबाद में डीजीएमएस की  स्थापना हुई थी 

    1908 में धनबाद में इसकी स्थापना हुई. डीजीएमएस  अपना 123 वां स्थापना दिवस मना रहा है. इसका मुख्य काम खनन के दौरान सुरक्षा मानकों का अनुपालन करना है. बता दें कि ब्रिटिश शासन काल में ही देश के कई हिस्सों में कोयला और दूसरे खनिजों के खनन का काम शुरू हो गया था. इस दौरान कई बड़े खान हादसे हुए.  इसके बाद खनन सुरक्षा कानून को कड़ाई से लागू करने के लिए खान सुरक्षा महानिदेशालय को अस्तित्व में लाया गया. इसका मुख्यालय धनबाद में है. यहां खान सुरक्षा महानिदेशक का दफ्तर है. इसी परिसर में डीजीएमएस का सेंट्रल जोन भी है. डीजीएमएस  ईस्टर्न सेंट्रल जोन का मुख्यालय पश्चिम बंगाल के सीतारामपुर, साउथ ईस्टर्न जोन का रांची, नॉर्थ जोन का गाजियाबाद, नॉर्थ वेस्ट जोन का उदयपुर, साउथ सेंट्रल जोन का हैदराबाद, साउथ जोन का बेंगलुरु और वेस्टर्न जोन का मुख्यालय नागपुर में है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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