झारखंड में पॉक्सो एक्ट की जांच के लिए नई गाइड लाइन, जिले के कप्तानों पर बढ़ा दी गई जवाबदेही 

    झारखंड में पॉक्सो एक्ट की जांच के लिए नई गाइड लाइन, जिले के कप्तानों पर बढ़ा दी गई जवाबदेही 

    धनबाद(DHANBAD): झारखंड में पॉक्सो के केस के अनुसंधान के नए गाइडलाइन जारी किए गए हैं. जिले के एसपी और नोडल पदाधिकारी पर जिम्मेवारी बढ़ाई गई है. राज्य के सीआईडी ने यह गाइडलाइन जारी किया है. जारी आदेश में कहा गया है कि हर 15 दिन में पोक्सो एक्ट के मामलो के अनुसंधान की अद्यतन स्थिति की समीक्षा नोडल पदाधिकारी करेंगे. उनके लिए यह जरूरी होगा कि वह अपने कार्यालय में पोक्सो एक्ट के सभी कांड की फाइल रखें.

    नोडल पदाधिकारी हर 15 दिन पर केस की समीक्षा करेंगे 

    हर जिले में पोक्सो एक्ट से जुड़े कांड के अनुसंधान और मॉनिटरिंग के लिए नोडल अफसर बनाए गए हैं. जिलों में डीएसपी रैंक के अधिकारी को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है. नोडल पदाधिकारी हर 15 दिन पर केस की समीक्षा करेंगे और उसी आधार पर आगे आदेश जारी करेंगे. वही अनुसंधान के बाद त्वरित सुनवाई, आरोपी को सजा दिलाने के लिए भी नोडल पदाधिकारी की जिम्मेवारी तय की गई है. पॉक्सो के मामलों में किसी भी जिले में केस होने के बाद इसकी जानकारी तत्काल जिले के एसपी को रेंज के डीआईजी को देनी होगी. प्राथमिकी संख्या के साथ पूरा अपडेट डीआईजी को भेजना होगा. सभी जिले के एसपी को भी नोडल पदाधिकारियों की तरह सभी पोक्सो एक्ट के कांड की फाइल अपने कार्यालय में रखनी होगी.

    एसपी को निर्देश है कि पोक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज होने के बाद जल्द से जल्द वह कांडों का पर्यवेक्षण करेंगे. इसके बाद पर्यवेक्षण संबंधी रिपोर्ट रेंज डीआईजी को भेजेंगे. साथ ही अभियुक्तों की गिरफ्तारी जल्द से जल्द करने का निर्देश देंगे.एसपी की जिम्मेवारी होगी कि पीड़ित किसी भी बच्चे की पहचान उजागर ना हो.  जांच के लिए स्मार्ट अफसरों के चयन का आदेश दिया गया है. पुलिस पदाधिकारी जो दरोगा हो, उन्हें ही जांच का जिम्मा देने को कहा गया है. अनुसंधानकर्ता को 60 दिनों के भीतर कांड का निष्पादन कर देना है. 2012 में पोक्सो एक्ट बना था. इस एक्ट के तहत 18 साल से कम लड़के या लड़कियों को बच्चा माना गया है. इनके साथ यौन उत्पीड़न  को अपराध की श्रेणी में रखा गया है. दो हजार अट्ठारह में इसमें संशोधन कर दोषियों के लिए मौत की सजा का प्रावधान किया गया. इस अधिनियम में यह भी प्रावधान है कि एक महिला अधिकारी प्रभावित बच्चे का बयान उसके निवास स्थान या पसंद की जगह पर दर्ज करेगी.देखना होगा सीआईडी के इस नए गाइडलाइन के बाद पोक्सो एक्ट की जांच में तेजी आती है या आदेश भी कागज की शोभा बढ़ाता रहेगा.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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