इजराइल की तर्ज पर खेती कर दूसरों के लिए बन रहे प्रेरणास्रोत गोड्डा के युवा किसान प्रीतम, जानिये जुनून की इस नई मिसाल को


गोड्डा(GODDA): सही सोच, सही मार्गदर्शन और सही प्रशिक्षण मिले तो व्यक्ति अपना लक्ष्य पाकर ही रहता है. कुछ ऐसा ही गोड्डा में गंगटा के युवा किसान प्रीतम कुमार ने कर दिखाया है. एक ओर जहां युवा खेती से विमुख होकर गांव से दूर अन्य क्षेत्रों में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, वहीं गोड्डा प्रखंड के गंगटा फंसिया गांव के प्रीतम कुमार आधुनिक तकनीक से कृषि में नया कीर्तिमान गढ़ने में लगे हुए हैं. ये आधुनिक खेती कर न सिर्फ अपनी आय दोगुना कर रहे हैं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बने हैं. गंगटा फंसिया फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड निदेशक प्रीतम कुमार 2018 में जिला कृषि विज्ञान केंद्र और आत्मा के सहयोग से इजराइल से खेती की नई तकनीक सीखकर अपने गांव पहुंचे है.

मल्चिंग और टपक तकनीक
गंगटा फंसिया गांव में प्रीतम कुमार ने हाई डेनसिटी प्लांटेशन के तहत 2020 में 2 बीघा जमीन पर तकरीबन 600 आम्रपाली और मनीषा आम के पौधे लगाए हैं. इन पौधों से महज 2 साल के अंदर 2022 में तकरीबन 10 से 12 क्विंटल आम का उत्पादन हुआ है. इतना ही नहीं 10 कट्ठा जमीन में इन्होंने अमरूद का पौधा भी लगाया है. उन्होंने बताया कि 2023 में तकरीबन आम के पौधे से 20-30 क्विंटल आम का उत्पादन होगा. आम के पौधे में न सिर्फ सघन विधि का प्रयोग किया है, बल्कि मल्चिंग और टपक विधि से भी खेती की जा रही है. इससें कम पानी में अच्छा उत्पादन हो रहा है. मिलचिंग के कारण मल्टी लेयर खेती की जा रही है. इसी आम के बगल में सूरजमुखी के अतिरिक्त भिंडी और अन्य सब्जियों का उत्पादन भी किया जा रहा है. प्रीतम कुमार ने बताया कि परंपरागत आम के पौधे में जहां 20 से 30 फीट की दूरी रखा जाता है, और पौधे से आम का फसल आने में तकरीबन 7 से 8 साल का समय लगता है. वहां इसे लगाने में मात्र 6 फीट की दूरी की जरूरत होती है और आम का पौधा काफी छोटा होता है, जिसके कारण अन्य फसल भी आसानी से इसमें लगाया जा सकता है. कम समय में ज्यादा फल इन पौधों से प्राप्त होता है. तोड़ने के समय लेबर का भी झंझट नहीं होता है.

आरटीपी मॉडल से धान की खेती
आम और अन्य सब्जियों के अलावे प्रीतम लगातार नई-नई तकनीक को अपनाकर उसका प्रयोग बखूबी करने में जुटे रहते हैं. संथाल परगना में पहली बार गोड्डा जिला में प्रीतम ने आरटीपी मॉडल से धान का पौधा रोपण किया हैं. उन्होंने बताया कि आरटीपी मॉडल के लिए डॉप्प विधि (ट्रे में बिचड़ा तैयार किया है) का प्रयोग किया गया है. ट्रे में वर्मी कंपोस्ट डालकर उसमें बीज देकर उसे तैयार किया जाता है. मशीन की मदद से इस ट्रे में लगे धान के पौधे को खेतों में रोपा जाएगा. जो श्री विधि के तहत 1-1 पौधे को मशीन ही रोपित करेगा. उन्होंने बताया कि इसको लेकर महिंद्रा कंपनी ने आरटीपी मशीन को डेमो के लिए यहां भेजा है. कहा कि इस बार वह आरटीपी मॉडल से 20 एकड़ में धान का फसल लगा रहे हैं. उन्होंने 2021 में पहली बार इस विधि का प्रयोग किया था, जो काफी सफल रहा. लेकिन कम रकबा में करने के कारण ज्यादा समझ में नहीं आया. इसलिए इस बार 20 एकड़ में आरटीपी मॉडल से धान का पौधा रोपण कर रहे है. उन्होंने बताया कि इसमें लेबर कॉस्ट कम लगता है, साथ ही धान का रोपण भी सही दूरी और सही तरीके से हो पाता है. इसके कारण धान का उत्पादन काफी अधिक होता है.
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जिला कृषि केंद्र का मिला सहयोग
प्रीतम कुमार ने बताया कि जिला कृषि विज्ञान केंद्र और आत्मा के दिशा निर्देशन में खेती के सारे काम किए जा रहे हैं. उद्यान विभाग से प्रशिक्षण मिला और बागवानी मिशन से आर्थिक सहायता मिलने के बाद हा प्रीतम अपने इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल हो पाए हैं. इजराइल से लौटने के बाद वह जिला कृषि विज्ञान केंद्र और आत्मा के सहयोग से कई जगह एक्सपोजर विजिट किए हैं. जिसमें कानपुर, गुजरात, दिल्ली, लखनऊ आदि के आसपास के क्षेत्रों में एक्स्पोज़र विजिट के बाद वह अत्याधुनिक तरीके से कृषि और बागवानी उत्पादन में लगे हुए हैं. कम पानी में बेहतर उपाय और ज्यादा मुनाफा के लिए आजकल काफी अच्छे-अच्छे तकनीक आए हैं. किसानों को इसे अपनाना चाहिए. प्रीतम कुमार मधु उत्पादन के अतिरिक्त काला गेहूं, हरा चना सहित कई नई किस्म के फसल का भी उत्पादन कर रहे हैं.
क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक
कृषि वैज्ञानिक डॉ रविशंकर ने बताया कि गंगटा फंसिया फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के प्रीतम कुमार खेती के क्षेत्र में आधुनिक प्रयोग कर रहे हैं. इजराइल से लौटने के बाद वे सघन, डीप और मल्चिंग विधि से खेती कर रहे हैं. जो काफी उपयोगी सिद्ध हो रहा है. विभाग भी उनकी आर्थिक और तकनीकी मदद कर रहा है. ताकि वह कृषि के क्षेत्र में अच्छा काम कर सकें.
रिपोर्ट: अजित कुमार सिंह, गोड्डा
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