राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की टीम पहुंची दुमका, नदारद मिले डीसी और एसपी -जानिए क्यों


दुमका (DUMKA): राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार आयोग की टीम दुमका पहुंची. दुमका पहुंचने का मकसद हाल के दिनों में दुमका में घटित पेट्रोल कांड और नाबालिग आदिवासी यूवती को पेड़ पर लटकाने के मामले की जांच करना था. आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो के नेतृत्व में टीम सबसे पहले पेट्रोल कांड से पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे. घटना की जानकारी ली. उसके बाद रानीश्वर के उस गांव पहुंची जहां की नाबालिग आदिवासी युवती को मार कर पेड़ पर लटका दिया गया था. लेकिन वहां पीड़ित परिवार से उनकी मुलाकात नहीं हुई. जिस पर उन्होंने नाराजगी जताई. उन्होंने कहा जब पूर्व से ही कार्यक्रम निर्धारित था और यह कहा गया था कि दोनों ही परिवार से मिलना है तो फिर जिला प्रशासन उसके परिजनों से क्यों नहीं मिला पाई. वहां से वापस लौट कर परिसदन में अधिकारियों से भी घटना की जानकारी ली. सबसे पहले तो परिसदन पहुंचने पर जब डीसी और एसपी के नहीं रहने पर एसडीओ को फटकार भी लगाई. अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने स्पष्ट कहा कि दोनों ही मामलों की जांच करने में जिला प्रशासन अक्षम साबित हो रही है इसलिए इन दोनों मामलों की उच्च स्तरीय जांच की अनुशंसा करेंगे.
मांगी गई थी जांच रिपोर्ट
झारखंड की उपराजधानी दुमका में नाबालिग बच्चियों के साथ दुष्कर्म और उत्पीड़न और जुर्म के आंकड़े थमने का नाम नहीं ले रहे. पहले अंकिता पेट्रोल कांड और अब नाबालिग आदिवासी की हत्या. इसको देखते हुए राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने दुमका के डीसी और एसपी को नोटिस भेजा था. नोटिस में इन दोनों से दुमका में अरमान अंसारी नाम के व्यक्ति जिसने नाबालिग आदिवासी के साथ दुष्कर्म करके उसको पेड़ पर लटकाने की घटना को अंजाम दिया था, इस पूरे मामले की जांच रिपोर्ट मांगी गई थी. साथ ही इन्हें आदेश दिया गया है कि जांच कर रहे पुलिस पदाधिकारी और आदिवासी बच्ची के शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो के साथ होने वाली बैठक में यह भी उपस्थित रहेंगे. लेकिन उनके पहुंचने तक कार्यलय में न तो डीसी पहुंचे थे और न ही जिला एसपी वहा मौजूद थे. इस पर आयोग आध्यक्ष कार्यलय में मौजूद अधिकारीयों पर जमकर बरसे.
NCPCR का मुख्य उद्देश्य
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) बाल अधिकारों के सार्वभौमिकता और अखंडता के सिद्धांतों पर बल देता है. देश के बच्चों से जुड़े सभी नीतियों में अत्यावश्यकता की आवाज को आधिकारिक रूप से मान्यता प्रदान करता है. आयोग के लिए 0 से लेकर 18 वर्ष की आयु वर्ग के सभी बच्चों की सुरक्षा समान महत्व रखता है.
रिपोर्ट: पंचम झा, दुमका
4+