धनबाद जिला परिषद में पॉवर की लड़ाई शुरू, सवाल -कैसे होगा 12 लाख लोगों का विकास


धनबाद (DHANBAD): धनबाद के जिला परिषद के कंधे पर 12 लाख लोगों को स्वास्थ्य, सड़क और शिक्षा देने की जिम्मेवारी है. गांव की इस सरकार का गठन 15 जून 22 को हुआ था. जहां अब विकास काम में तेजी आनी चाहिए, लेकिन गठन के कुछ महीने के बाद से ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बीच शीतयुद्ध शुरू हो गया है. भाजपा समर्थित शारदा सिंह धनबाद जिला परिषद कीअध्यक्ष हैं, तो तोपचांची की रहने वाली सरिता देवी उपाध्यक्ष बनी हैं. अभी हाल ही में उपाध्यक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि उनके कक्ष में सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं जबकि अध्यक्ष के कमरे की सजावट की गई है. यह हाल है धनबाद जिला परिषद का. इधर, और पत्र भी लिखा गया है. जनता की सेवा का वचन देकर चुनाव जीतने वालो को अब जनता की चिंता नहीं है.
अब तक नहीं की गई है स्थाई समितियों का गठन
अगर चिंता होती तो अब तक स्थाई समितियों का गठन कर दिया गया होता. इन समितियों के जिम्मे में योजनाओं की मॉनिटरिंग करने की जिम्मेवारी होती है. धनबाद जिला परिषद में 8 स्थाई समितियां होती हैं. इन समितियों में सभापति और सदस्य होते हैं. प्रत्येक समिति में एक सभापति और न्यूनतम 5 सदस्य बनाए जाते हैं. धनबाद जिला परिषद में कुल 29 सदस्य हैं.आपको बता दें कि शारदा सिंह दूसरी बार महिला अध्यक्ष चुनी गई हैं. इसके पहले पूर्व विधायक फूलचंद मंडल की पतोहू माया देवी महिला अध्यक्ष चुनी गईं थी. बता दें कि जिला परिषद के पास लगभग ढाई दर्जन अस्पताल हैं, इन अस्पतालों में होम्योपैथी, आयुर्वेदिक अस्पताल शामिल है, लेकिन जिला परिषद के पास एक भी डॉक्टर नहीं है. फिर 12 लाख लोगों को क्या सुविधा मिलती होगी या कोई भी समझ सकता है. जितने के बाद कोई भी प्रतिनिधि बदहाली देखने नहीं पहुंचा है.
पत्राचार कर मांगी जा रही है अधिकारों की जानकारी
जानकारी मिली है कि उपाध्यक्ष सरिता देवी ने फिर पत्र लिखा है. उपाध्यक्ष ने जिला परिषद के क्रिया-कलापों पर सवाल खड़े किए हैं. जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह डीडीसी शशिरंजन को भी पत्र भी लिखा है. पत्र में संचिका भेजे जाने संबंधी पंचायती राज अधिनियम की जानकारी मांगी गई है. उपाध्यक्ष ने पत्र में आरोप लगाया है कि जिला परिषद में कई अनियमितता बरती जा रही है. विपत्र भुगतान में भी गड़बड़ी की बात है. पत्र में लिखा गया है कि जिला परिषद में किसी भी योजना में खर्च की मंजूरी जिला परिषद बोर्ड की मंजूरी से होती है. विकास योजनाओं को पूरा कराकर भुगतान का दायित्व कार्यपालक पदाधिकारी तथा मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी का है. किस नियम के अनुसार भुगतान वाली संचिकाएं जिला परिषद के अध्यक्ष के पास भेजी जा रही है. इसके संबंध में नियमावली क्या है, अगर अध्यक्ष के पास संचिकाएं भेजी जा सकती हैं तो फिर उपाध्यक्ष के पास भी भेजी जानी चाहिए.
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