Nikay Chunaw: आया बड़ा अपडेट-पार्षद के साथ-साथ मेयर का भी चुनाव कैसे लड़ पाएंगे उम्मीदवार !


धनबाद(DHANBAD) : धनबाद माफिया नगरी है. यहां दिखावे की राजनीति खूब होती है. छोटे बड़े नेता लंबे-चौड़े वाहनों के काफिले के साथ चलते हैं. उनका मानना होता कि जिनके काफिले में अधिक और महंगी गाड़ियां होगी, वह "वजनी" समझे जाएंगे, ऐसे कई नेता निगम चुनाव लड़ने के लिए सक्रिय हैं. लेकिन चुनाव आयोग के निर्देश के मुताबिक नामांकन के समय वह "शक्ति प्रदर्शन" नहीं कर पाएंगे. राज्य निर्वाचन आयोग ने सिर्फ तीन वाहनों के साथ पहुंचने की अनुमति दी है. इससे अधिक वाहन लेकर जाने पर प्रत्याशियों पर आदर्श आचार संहिता उल्लंघन का मामला दायर हो जाएगा. सूत्रों के अनुसार निर्वाचन आयोग ने नई गाइडलाइन जारी कर दी है. इस गाइडलाइन के मुताबिक नामांकन के लिए प्रत्याशी अपने साथ सिर्फ पांच लोग ही लेकर जा सकते हैं.
नई गाइडलाइन से उम्मीदवारों के शक्ति -प्रदर्शन पर रहेगी रोक
नामांकन में समर्थकों की भीड़ लेकर नामांकन स्थल की सीमा में प्रवेश प्रतिबंध रहेगा. यह भी जरूरी है कि नगर निगम चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे उम्मीदवार अपने नामांकन के समय जिसे भी अपना प्रस्तावक बनाएंगे, वह भी नगर निगम क्षेत्र का वोटर होना चाहिए। नामांकन शुल्क भी निर्वाचन आयोग ने तय कर दिया है. मेयर और अध्यक्ष पद के लिए₹5000 शुल्क देना होगा. पार्षद एवं वार्ड सदस्यों के लिए यह शुक्ल ₹1000 होगा. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और महिला प्रत्याशी के लिए यह शुल्क आधा लगेगा. यानी मेयर, अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करने पर उन्हें ₹2500 और पार्षद ,वार्ड पार्षद के नामांकन के लिए ₹500 देने होंगे. नई अधिसूचना के मुताबिक कोई भी प्रत्याशी अलग-अलग पदों के लिए चुनाव लड़ सकता है. पार्षद पद पर चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी मेयर के लिए भी चुनाव लड़ सकते हैं.
अलग-अलग वार्ड से पार्षद का चुनाव नहीं लड़ सकते उम्मीदवार
लेकिन दो अलग-अलग वार्ड से पार्षद का चुनाव नहीं लड़ सकते. पार्षद का चुनाव सिर्फ एक ही वार्ड से लड़ सकेंगे. वैसे अभी पूरे झारखंड में निकाय चुनाव की चर्चा है. तैयारी भी उसी की है. सड़कों पर झक झक खादी दिखने लगी है. वोटरों के दरवाजे पर उम्मीदवार बनने की इच्छा रखने वाले दस्तक देने लगे हैं. बैठकों का दौर चल रहा है. राजनीतिक दल उम्मीदवारी के लिए एक मत बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं. सब कोई एक दूसरे से आगे निकलने की कोशिश कर रहा है. पिछले निकाय चुनाव में कम से कम मेयर के पद पर भाजपा का दबदबा था. इस बार भी भाजपा अपनी उस दबदबे को बनाए रखना चाहती है, जबकि अन्य दल भी शहरी वोटरों में सेंध लगाने की मजबूत तैयारी कर रहे हैं.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
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