धनबाद में अस्तित्वविहीन कंपनियों के नाम पर 300 करोड़ से अधिक का  "खेल", निरसा में भी चल रही थी शेल कंपनी !

    धनबाद में अस्तित्वविहीन कंपनियों के नाम पर 300 करोड़ से अधिक का  "खेल", निरसा में भी चल रही थी शेल कंपनी !

    धनबाद (DHANBAD) : अवैध कोयला कारोबार के लिए कुख्यात हुए धनबाद में अस्तित्वविहीन(शेल ) कंपनियों के नाम पर बड़ा "खेल "चल रहा है.  राज्य कर विभाग की कार्रवाई में एक से एक खुलासे  हो रहे है. अभी हाल ही में 10 अस्तित्वविहीन कंपनियां के नाम पर किए गए खेल में 300 करोड़ से भी अधिक का अवैध कोयला, लोहा और सीमेंट बेचने का खुलासा हुआ है. इसके अलावा निरसा  की एक कंपनी के नाम पर भी 12 करोड रुपए का जीएसटी घोटाला करने का मामला भी सामने आ गया है.  धनबाद में अस्तित्वविहीन कंपनियां बनाकर करोड़ों -करोड़  का खेल किया जा रहा है. कोयला कारोबार में कर चोरी  के लगातार खुलासे  हो रहे हैं. राज्य कर अन्वेषण विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है. यह विभाग अस्तित्वविहीन  कंपनियों के खिलाफ लगातार छापेमारी कर रहा है. विभाग की कार्रवाई जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, एक पर एक खुलासे  हो रहे है. 

    दो दिन पहले दस शेल  कंपनियों की जाँच में हुआ था बड़ा खुलासा 

    दो दिन पहले धनबाद में 10 शेल  कंपनियां की जांच पड़ताल हुई, उसमें खुलासा हुआ कि 10 शेल  कंपनियों के नाम पर ई वे बिल यानी  परमिट निकालकर 330 .54 करोड रुपए का अवैध कोयला, लोहा और सीमेंट की बिक्री की गई है.  इधर, यह भी  पता  फर्जी कंपनी बनाकर 12 करोड़ जीएसटी चोरी का एक और मामला  सामने आया है. मंगलवार को इसका खुलासा हुआ.  राज्य कर विभाग की जांच में खुलासा हुआ है कि मनीष इंटरप्राइजेज नामक एक फर्जी कंपनी बनाकर 12 करोड़  रुपए जीएसटी की चोरी की गई है. यह  कंपनी किसी राजकुमार सिंह के नाम से रजिस्टर्ड है.  प्रारंभिक जांच में इसका लेनदेन पूरी तरह संदिग्ध  पाया गया है.  मनीष इंटरप्राइजेज का जीएसटी रजिस्ट्रेशन निरसा के तेतुलिया क्षेत्र के एक पते पर कराया गया था.  मंगलवार को अधिकारियों की टीम सत्यापन के लिए उक्त पते  पर पहुंची। वहां कोई कंपनी नहीं पाई गई.  मकान मालिक ने स्पष्ट किया कि वहां किसी प्रकार की कंपनी का  संचालन नहीं होता है.  

    निरसा में चल रही थी एक अस्तित्वविहीन कंपनी 

    अधिकारियों ने जब मकान मालिक को  रेंट एग्रीमेंट पेपर दिखाया, जिसके आधार पर जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराया गया था, तो मकान मालिक ने ऐसे किसी भी रेंट एग्रीमेंट से भी इंकार कर दिया।  अधिकारियों की माने तो कंपनी ने शुरुआत में सीमेंट, लोहा, के व्यापार का हवाला देकर जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराया था.  बाद में इसमें कोयले के व्यापार को भी शामिल कर लिया गया.  सूत्रों के अनुसार विभाग के एडवांस्ड एनालिटिकल टूल्स के जरिए कंपनी के असामान्य लेनदेन,संदिग्ध   टर्नओवर और इनपुट टैक्स क्रेडिट  पैटर्न को चिन्हित किया गया था.  इन संकेतों के आधार पर जब विस्तृत जांच  शुरू की गई, तो कर चोरी का बड़ा मामला उजागर हुआ.  संभावना है कि  जांच आगे बढ़ेगी तो और मामले खुलेंगे। सूत्र बताते है कि पिछले साल जनवरी महीने भी धनबाद में एक बडा  रेड हुआ था. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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