गढ़वा (GARHWA): जिले के मेराल प्रखंड अंतर्गत गोन्दा पंचायत में सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है. जिला प्रशासन की जांच में अबुआ आवास और मनरेगा योजनाओं में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं. उप विकास आयुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा की जांच के बाद वर्तमान बीडीसी और बिचौलियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया, जिसके बाद मेराल थाना में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.
शिकायत के अनुसार, लाभुक सुनीता देवी ने बीडीसी कृष्ण देव प्रजापति पर आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम पर 20,000 रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगाया है. वहीं ज्वाला प्रसाद नामक बिचौलिये पर भी लाभुकों से 5,000 से 40,000 रुपये तक की अवैध वसूली करने का आरोप है.
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि लातदाग गांव में बिना सूचना पट्ट के डोभा निर्माण कराया गया और तय मानकों का पालन नहीं किया गया. इस पर संबंधित मुखिया और कर्मियों पर जुर्माना लगाया गया है. साथ ही 23 डिफॉल्टर लाभुकों से सरकारी राशि की वसूली के लिए सर्टिफिकेट केस चलाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है.
जांच के समय कई लाभुकों ने लिखित बयान देकर भ्रष्टाचार का खुलासा किया. सरोजा देवी और रूबी देवी सहित अन्य लोगों ने बताया कि उनसे योजना का लाभ दिलाने के बदले मोटी रकम ली गई. मामले को गंभीर मानते हुए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. मनरेगा कार्यों में लापरवाही मिलने पर संबंधित मुखिया, पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सेवक पर 500-500 रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है.
मेराल के बीडीओ सह अंचल पदाधिकारी यशवंत नायक ने बताया कि डीडीसी के निर्देश के बाद बीडीसी कृष्ण देव प्रजापति और बिचौलिये ज्वाला प्रसाद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया गया है. उन्होंने साफ कहा कि भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शा जाएगा.
वहीं थाना प्रभारी विष्णु कांत के अनुसार, आवेदन के आधार पर मेराल थाना कांड संख्या 56/26 दर्ज किया गया है. यह मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2) और 318(4) के तहत दर्ज हुआ है. केस की जांच एसआई हरिशंकर ओझा को सौंपी गई है और पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर साक्ष्य जुटाने में लगी है.
Thenewspost - Jharkhand
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