टीएनपी डेस्कज(TNP DESK): कोल इंडिया में ट्रेड यूनियनों की राजनीति अब पूरी तरह बदलने जा रही है. वर्षों से चली आ रही यूनियन अब बदलने जा रही है. वाली नई व्यवस्था में यूनियनों की असली ताकत कर्मचारियों के वोट से तय होगी. औद्योगिक संबंध संहिता (IR Code) 2020 के केंद्रीय नियमों की 8 मई को जारी अधिसूचना के बाद कोल इंडिया और उससे जुड़ी यूनियनों में हलचल तेज हो गई है. कंपनी प्रबंधन द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति ने भी अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें नए नियमों को लागू करने की सिफारिश की गई है.
नई व्यवस्था के तहत अब यूनियन की मान्यता “चेक-ऑफ सिस्टम” से नहीं, बल्कि सीधे चुनाव और मतदान के जरिए तय होगी. यदि कोई यूनियन वोटों का 51 प्रतिशत या उससे अधिक हासिल कर लेती है, तो उसे एकमात्र वार्ताकार यूनियन का दर्जा मिलेगा. वहीं अगर कोई यूनियन यह आंकड़ा पार नहीं कर पाती, तो कम-से-कम 20 प्रतिशत वोट पाने वाली यूनियनों को मिलाकर वार्ताकार परिषद बनाई जाएगी. 20 प्रतिशत से कम वोट हासिल करने वाली यूनियनों को अगले पांच सालों तक मान्यता नहीं मिलेगी.
चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त सत्यापन अधिकारी इसकी निगरानी करेंगे. केवल वही कर्मचारी मतदान कर सकेंगे, जिनका नाम तय कट-ऑफ डेट तक मतदाता सूची में दर्ज होगा. चुनाव के बाद मिलने वाली मान्यता पांच वर्षों तक वैध रहेगी, जिससे यूनियन राजनीति में स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है.
कोल इंडिया स्तर पर प्रतिनिधित्व के लिए भी नई शर्तें तय की गई हैं. अब किसी यूनियन को कंपनी स्तर की वार्ताकार परिषद में शामिल होने के लिए कम-से-कम पांच अनुषंगी कंपनियों में 20 प्रतिशत वोट हासिल करना जरूरी होगा. यानी अब सिर्फ एक क्षेत्र में मजबूत पकड़ होने से काम नहीं चलेगा, बल्कि व्यापक समर्थन जरूरी होगा.
नई व्यवस्था के तहत 90 दिनों का विस्तृत चुनाव कैलेंडर भी तैयार किया गया है. इसमें मतदाता सूची निर्धारण से लेकर गुप्त मतदान, मतगणना और अंतिम मान्यता आदेश तक की पूरी समयसीमा तय रहेगी. इससे प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और विवाद रहित बनाने की कोशिश की गई है.
इसके साथ ही कोल इंडिया में चार-स्तरीय वार्ता प्रणाली लागू होगी. मुख्यालय स्तर पर वेतन समझौते, ट्रांसफर नीति और कैडर जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा होगी, जबकि सब्सिडियरी, एरिया और प्रोजेक्ट स्तर पर स्थानीय और संचालन संबंधी समस्याओं का समाधान किया जाएगा.
महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी बड़ा बदलाव किया गया है. अब वर्क्स कमेटी और शिकायत निवारण समितियों में महिलाओं की अनुपातिक भागीदारी अनिवार्य होगी. मार्च 2026 के आंकड़ों के मुताबिक कोल इंडिया में 19 हजार से अधिक महिला कर्मचारी कार्यरत हैं. ऐसे में यह फैसला महिला कर्मियों की भागीदारी और आवाज को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

