Loksabha Election: सातवें चरण के लिए चुनाव प्रचार का शोर शुरू, अब संथाल परगना प्रमंडल में लगेगा नेताओं का जमघट, चलेंगे शब्दबाण

    Loksabha Election: सातवें चरण के लिए चुनाव प्रचार का शोर शुरू, अब संथाल परगना प्रमंडल में लगेगा नेताओं का जमघट, चलेंगे शब्दबाण

    दुमका (DUMKA): देश में लोक सभा का चुनाव चल रहा है. 7 चरणों में सम्पन्न होने वाले चुनाव में 6ठे चरण के लिए प्रचार प्रसार थम गया है. 25 मई को मतदान होगा.अब सभी दल 7वां और अंतिम चरण के लिए 1 जून को होने वाले मतदान के लिए प्रचार प्रसार में अपनी ताकत झोंकेगा.

    1 जून को दुमका, गोड्डा और राजमहल सीट के लिए होगा मतदान

     झारखंड की बात करें तो 7वे चरण में संथाल परगना प्रमंडल के गोड्डा,  दुमका और राजमहल लोक सभा क्षेत्र में मतदान होगा. अब सभी दलों के नेताओं का जमघट संथाल परगना में लगेगा. शुक्रवार को इसकी बानगी देवघर में देखने को मिल रही है. भाजपा के तरफ से केंद्रीय गृह मंत्री अमित साह का मधुपुर में कार्यक्रम निर्धारित है. गोड्डा से भाजपा प्रत्याशी निशिकांत दुबे के पक्ष में मतदाताओं को रिझाएंगे तो इंडी गठबंधन प्रत्याशी प्रदीप यादव के पक्ष में मोहनपुर में आयोजित जनसभा को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित गठबंधन के घटक दलों के नेता संबोधित करेंगे.

    28 मई को पीएम के संथाल परगना दौरा की है संभावना

     दुमका में भी प्रचार प्रसार जोड़ पकड़ेगा. शुक्रवार को जामा प्रखंड में गीता कोड़ा तो काठीकुंड प्रखंड में मधु कोड़ा का जनसंपर्क अभियान निर्धारित है. वैसे तो अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों की माने तो 28 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संथाल परगना की धरती पर गरजेंगे. पीएम के कार्यक्रम को लेकर कई स्थलों को पार्टी द्वारा देखा गया. दुमका हवाई अड्डा, जामा विधान सभा क्षेत्र या पाकुड़ जिला में पीएम के कार्यक्रम को लेकर चर्चा हुई. लेकिन अंतिम मोहर दुमका हवाई अड्डा पर लगने की बात कही जा रही है. हो सकता है जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा भी हो जाए.

    दुमका सीट भाजपा के लिए है प्रतिष्ठा का विषय

     वैसे भी झारखंड की राजनीति में दुमका सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है. इस सीट से भाजपा प्रत्याशी सीता सोरेन के सामने झमुमो से नलीन सोरेन मैदान में है. झमुमो के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है. भाजपा हल हाल में यह सीट जीतना चाहेगी, क्योंकि पार्टी ने निवर्तमान सांसद सुनील सोरेन को टिकट देकर वापस लिया और रणनीति के तहत झमुमो छोड़ भाजपा का दामन थामने वाली शीबू सोरेन की बड़ी पुत्रबधू सीता सोरेन को प्रत्याशी बना दिया.

    सीता सोरेन के सामने हैं नलीन सोरेन

    झमुमो की बात करें तो नलीन सोरेन 7 टर्म से शिकारीपाड़ा के विधायक हैं. हेमंत सोरेन के जेल जाने और शीबू सोरेन की बढ़ती उम्र और शारीरिक अस्वस्थता के कारण पार्टी ने नलीन सोरेन को मैदान में उतारा. 1977 के बाद पहली बार ऐसा हुआ जब सोरेन परिवार का कोई सदस्य झामुमो के टिकट पर दुमका लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ रहा है. इसके बाबजूद झामुमो इस सीट को जीतने का हर संभव प्रयास करेगी. नलीन के नामांकन में सीएम चंपाई सोरेन, पूर्व सीएम हेमंत की पत्नी कल्पना सोरेन सहित इंडी गठबंधन के कई नेता शामिल हुए थे. मंत्री बसंत सोरेन दुमका में कैम्प किए हुए हैं. अब झामुमो के तमाम नेता दुमका की ओर रुख करेंगे और नलीन सोरेन की जीत सुनिश्चित करने के लिए एड़ी चोटी एक करेंगे.

    इस चुनाव में दिशोम गुरु शीबू सोरेन की क्या रहेगी भूमिका

     वैसे तो चुनाव की घोषणा के बाद पार्टी सुप्रीमो शीबू सोरेन का दुमका आगमन नहीं हुआ है. लेकिन लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी है कि इस चुनाव में दिशोम गुरू की भूमिका क्या होती है? एक तरफ पार्टी प्रत्याशी नलीन सोरेन है तो दूसरी तरफ भाजपा के टिकट पर उनकी बड़ी पुत्रवधु सीता सोरेन चुनाव लड़ रही है. पार्टी और परिवार से बगावत का बाबजूद सीता सोरेन हमेशा कहती रही है कि गुरुजी का आशीर्वाद उनके साथ है. हर मंच से सीता ने गुरुजी को सम्मान देती नजर आ रही है. इस स्थिति में अगर गुरु जी दुमका पहुचते है तो यह देखना दिलचस्प होगा कि उनका आशीर्वाद सीता को मिलता है या नलीन को? दोनों ही प्रत्याशी के जीत हार में गुरुजी का चेहरा काफी अहम माना जा रहा है.

    झमुमो के बागी लोबिन ने राजमहल के रण को बनाया रोचक

    राजमहल सीट जीतना भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. क्योंकि 2014 और 2019 क मोदी लहर के बाबजूद झमुमो ने बिजय हांसदा के माध्यम से इस सीट को अपने कब्जे में रखा. इस बार बिजय हांसदा जीत की हैट्रिक लगाने मैदान में हैं तो भाजपा ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ताला मरांडी को राजमहल की रणभूमि में बिजय हांसदा के बिजय रथ को रोकने के लिए मैदान में उतारा है. इस सबके बीच झामुमो के बागी विधायक लोबिन हेम्ब्रम ने निर्दलीय मैदान में कूदकर राजमहल के रण को रोचक बना दिया है.

    कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि अब 30 मई तक तमाम दलों के नेताओं का जमघट संथाल परगना प्रमंडल में लगेगा और यहां की धरती से एक दूसरे पर शब्दबाण चलेंगे.

    रिपोर्ट: पंचम झा


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