निकाय चुनाव: टूट गया महागठबंधन का भी ताना -बाना, पार्टी की दुहाई देने वाले कैसे दिखाने लगे है आंखे!


धनबाद(DHANBAD): झारखंड में निकाय चुनाव 2026 कुछ अलग ढंग से होने जा रहा है. पार्टियों का "डंडा" काम नहीं आ रहा , तो महागठबंधन में भी दरार आ गया है. पार्टी की दुहाई देने वाले इस बार पार्टी को ही आंखे दिखाने लगे है. नतीजा हुआ कि पार्टियों का टेंशन बढ़ गया है. पार्टी चाहे भाजपा हो, कांग्रेस हो अथवा झामुमो हो, सभी दल के नेताओं में टेंशन है. निगम चुनाव को लेकर झारखंड में महागठबंधन की एकता भी तार -तार हो गई है. कई लोग पार्टी समर्थित उम्मीदवार के खिलाफ मैदान में उतर गए हैं. झारखंड में नौ नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायत के चुनाव होने जा रहा है. निकाय चुनाव में झामुमो , कांग्रेस और राजद में भी कोई एक फार्मूला तय नहीं हो पाया।
महागठबंधन में शामिल डालो में भी नहीं बना कोई फार्मूला
नतीजा हुआ कि नगर निगम में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार भी हैं, तो झामुमो समर्थित उम्मीदवार भी मैदान में ताल ठोक रहे हैं. कई जगहो पर तो स्थितियां उम्मीद से अलग हैं. झारखंड में फिलहाल हेमंत सोरेन के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार चल रही है. उम्मीद की जा रही थी कि गठबंधन के सहयोगी दल आपस में मिल -बैठकर कोई एक फार्मूला तय करेंगे। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. यह अलग बात है कि इस बार निकाय चुनाव में पार्टियों ने भी अति आत्मविश्वास में कुछ जल्दवाजी कर दी. पहले से ही हल्ला मचाया गया था कि पार्टी समर्थित उम्मीदवार ही चुनाव में खड़ा हो सकता है. ऐसे में जब चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहा है तो कार्यकर्ताओं में भी चुनाव लड़ने की इच्छा जागृत हुई और वह इच्छा पार्टी के अनुशासन पर भारी पड़ गई. नतीजा हुआ कि कहीं भाजपा, भाजपा के बागी उम्मीदवारों से लड़ रही है तो कहीं कांग्रेस, कांग्रेस के बागी उम्मीदवारों से लड़ रही है.
महागठबंधन में शामिल दलों के उम्मीदवार भी आमने -सामने
महागठबंधन में शामिल दलों के उम्मीदवार तो आमने-सामने है ही, कई जगहों पर तो बागी उम्मीदवार पार्टियों को परेशानी में डाल दिए हैं. पिछले निकाय चुनाव में सात भाजपा समर्थित अथवा भाजपा से जुड़े उम्मीदवार मेयर बने थे. चास और देवघर में निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीते थे. मानगो में चुनाव हुआ ही नहीं था. इस बार भाजपा को अपने पुराने रिकॉर्ड से आगे बढ़ने की चुनौती है तो कांग्रेस भी ताल ठोक रही है. इधर, झामुमो गांव और शहर की दूरी को पाटने में लगा हुआ है. कुल मिलाकर लड़ाई दिलचस्प दौर में पहुंचने वाली है. देखना दिलचस्प होगा कि क्या बागी उम्मीदवारों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाता है अथवा पार्टी कोई दूसरा रास्ता अख्तियार करती है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
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