हेमंत और कल्पना का शादी से लेकर राजनीति तक का सफर

    हेमंत और कल्पना का शादी से लेकर राजनीति तक का सफर

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): कहते हैं हर कामयाब मर्द के पीछे एक औरत का हाथ होता है, लेकिन झारखंड की सियासत ने यह भी देखा है कि बुरे वक्त में सबसे बड़ी ढाल वही पत्नी बनकर सामने आती है. आज 7 फरवरी है और आज ही के दिन 19 साल पहले झारखंड की राजनीति के सबसे ताकतवर दंपत्ति हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने एक-दूसरे का हाथ थामा था.

    7 फरवरी 2006 को हेमंत सोरेन और कल्पना मुर्मू ने संताली रीति-रिवाजों के साथ सात फेरे लिए थे. तब किसी ने शायद नहीं सोचा होगा कि यह रिश्ता राज्य की राजनीति की सबसे मजबूत जोड़ी बन जाएगा. कल्पना सोरेन जो ओडिशा के मयूरभंज की रहने वाली हैं.उन्होने कभी नहीं सोचा होगा कि एक दिन वह पूरे राज्य की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाएंगी.

    शादी के बाद कल्पना सोरेन का साथ हेमंत सोरेन के लिए भाग्यशाली साबित हुआ. उनके राजनीतिक सफर में तेजी तब आई जब उन्होंने

    • पहले राज्यसभा की सीट हासिल की,
    • फिर दुमका से चुनाव जीतकर राजनीति में मजबूती बनाई,
    • बाद में उपमुख्यमंत्री,
    • और अब झारखंड के मुख्यमंत्री बनकर राज्य की कमान संभाली।

    कल्पना सोरेन सिर्फ एक राजनेता की पत्नी नहीं हैं, बल्कि खुद एक प्रतिभा का भंडार हैं. बचपन में वे हॉकी खिलाड़ी बनना चाहती थीं. केंद्रीय विद्यालय में उन्होंने अपने खेल से सबको चौंकाया, लेकिन पिता के लगातार ट्रांसफर के कारण उनका यह सपना अधूरा रह गया.लेकिन पढ़ाई में वे अव्वल रहीं. 12वीं के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की और राज्य में 13वां स्थान तथा अनुसूचित जनजाति श्रेणी में पहला स्थान प्राप्त किया.

    वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता 31 जनवरी 2024 को झारखंड की राजनीति में भूचाल आ गया, जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जेल जाना पड़ा. विरोधी दावे कर रहे थे कि JMM बिखर जाएगी. सरकार गिर जाएगी, लेकिन उस वक्त पर्दे के पीछे रहने वाली कल्पना सोरेन सामने आईं. उनके बिना पार्टी के टूटने का डर था. लेकिन कल्पना ने पार्टी को संभाला और कड़ी मेहनत से उसे बचाया. कल्पना सोरेन ने जेएमएम के स्थापना दिवस समारोह में पहली बार जोरदार वापसी की फिर उन्होंने गांडेय विधानसभा से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की इसके बाद वे पूरे झारखंड में इंडिया गठबंधन की स्टार प्रचारक बनीं और पार्टी की कमान संभाली.

    राज्य के मुख्यमंत्री की पसंद आज भी मिट्टी से जुड़ी है. कल्पना सोरेन ने कई बार बताया है कि हेमंत सोरेन को ताम-झाम वाला खाना पसंद नहीं है. उन्हें मिट्टी के बर्तन में बना साग-भात सबसे प्रिय है. वे पूरी तरह शाकाहारी हैं और जब भी गांव जाते हैं, तो ढेकी का कूटा हुआ चावल ही मांगते हैं. आज इस खास मौके पर दोनों पति-पत्नी मां छिन्नमस्तिका के दरबार रजरप्पा मंदिर पहुंचे.सादगी के साथ पूजा-अर्चना की और राज्य की खुशहाली की दुआ मांगी. इस दौरान रामगढ़ जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था भी मौजूद रही.

    मुख्यमंत्री की कुर्सी से लेकर जेल की सलाखों तक हर मोड़ पर हेमंत सोरेन का साथ निभाने वाली कल्पना सोरेन आज उनकी सबसे मजबूत कड़ी बन चुकी हैं और 19 साल के इस सफर ने साबित कर दिया है कि एक सच्ची पत्नी ही नहीं बल्कि एक सच्ची साथी और नेता भी कितनी बड़ी ताकत होती है.


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