झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव: 12 मार्च को होगा मतदान, अधिवक्ताओं के कल्याण और सुरक्षा पर टिकी नजरें


धनबाद (DHANBAD): न्यायालय के आदेश के बाद झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव की प्रक्रिया पूरी तरह रफ्तार पकड़ चुकी है. आगामी 12 मार्च 2026 को होने वाले मतदान को लेकर पूरे राज्य में चुनावी माहौल गरमा गया है. यह चुनाव सिर्फ अधिवक्ताओं के प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे महिला सशक्तिकरण और अधिवक्ताओं की सुरक्षा से जुड़ा एक अहम मोड़ माना जा रहा है. चुनाव के लिए नामांकन 10 और 11 फरवरी 2026 को होगा, जबकि मतदान 12 मार्च को संपन्न कराया जाएगा. इस चुनाव में झारखंड भर से 17,000 से अधिक अधिवक्ता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे.
इस बार के चुनाव की सबसे बड़ी खासियत है महिलाओं की रिकॉर्ड भागीदारी. करीब 700 महिला उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरी हैं. बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के निर्देश पर इस बार आरक्षण व्यवस्था लागू की गई है, जिससे महिला अधिवक्ताओं को आगे बढ़ने का मजबूत मंच मिला है.
वरिष्ठ अधिवक्ता राधेश्याम गोस्वामी का कहना है कि जब नारी शक्ति नेतृत्व में आएगी, तो व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव और विकास को नई दिशा मिलेगी. उन्होंने बताया कि इस बार चुनाव में कई अहम मुद्दों पर खुलकर चर्चा हो रही है, जो आने वाले अध्यक्ष और काउंसिल सदस्यों के लिए बड़ी चुनौती होंगे. उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि समाज के हर वर्ग की सुरक्षा के लिए कानून हैं, लेकिन न्याय दिलाने वाले अधिवक्ताओं की सुरक्षा को लेकर अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं बन पाई है. देशभर में अधिवक्ताओं पर हो रहे हमलों और हत्याओं को देखते हुए एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरी है.
इसके साथ ही अधिवक्ता कल्याण से जुड़ी योजनाएं भी चुनावी बहस के केंद्र में हैं. पेंशन योजना को लागू कराना, अधिवक्ताओं के लिए आवास सुविधा यानी अधिवक्ता कॉलोनी का निर्माण, और स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाओं को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया से समन्वय-ये सभी मुद्दे उम्मीदवारों के लिए अग्निपरीक्षा साबित होंगे. चुनाव को लेकर यह भी तय किया गया है कि झारखंड के हर जिला मुख्यालय स्थित बार एसोसिएशन में मतदान केंद्र बनाए जाएंगे. इस प्रक्रिया के तहत कुल 25 सदस्य चुने जाएंगे, जो बाद में आपस में मिलकर स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और BCI प्रतिनिधि का चयन करेंगे.
धनबाद समेत पूरे झारखंड में चुनावी हलचल तेज हो चुकी है. अधिवक्ताओं का साफ कहना है कि इस बार वही उम्मीदवार जीतेगा, जिसने वास्तव में जमीन पर उनके हितों के लिए काम किया हो. अब सबकी निगाहें 12 मार्च पर टिकी हैं, क्योंकि इसी दिन 17,000 अधिवक्ताओं के भविष्य का फैसला होना है.
रिपोर्ट-नीरज कुमार
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