झारखंड का परिणाम: कल्पना सोरेन और चंपई सोरेन ने आपदा को अवसर में कैसे बदला, पढ़िए इस रिपोर्ट में

    झारखंड का परिणाम: कल्पना सोरेन और चंपई सोरेन ने आपदा को अवसर में कैसे बदला, पढ़िए इस रिपोर्ट में

    धनबाद(DHANBAD): झारखंड में लोकसभा चुनाव के परिणाम से इंडिया गठबंधन को ताकत मिली है. तो एनडीए के लिए भी इस चुनाव परिणाम में कम से कम विधानसभा चुनाव में और अधिक मेहनत करने का संदेश है. इंडिया गठबंधन 5 सीटें झारखंड में जीतकर उत्साहित होगा. इस बात के लिए भी प्रसन्नचित होगा कि राज्यसभा और लोकसभा में उसके बराबर ,बराबर सदस्य हो गए हैं.

    झारखंड में इसी साल नवंबर, दिसंबर में विधानसभा का चुनाव होने वाले हैं. झारखंड के आदिवासी सीटों पर इंडिया  गठबंधन को बड़ा फायदा हुआ है. पांचो सीटें एनडीए गठबंधन ने जीत लिया है .अब इन सीटों के अंतर्गत आने वाले 24 आरक्षित विधानसभा सीटों पर विधानसभा चुनाव में कड़ा संघर्ष होगा. दुमका सीट से भाजपा प्रत्याशी सीता सोरेन की हार ने भी झारखंड मुक्ति मोर्चा को टॉनिक का काम किया होगा. झारखंड मुक्ति मोर्चा इस बात को लेकर खुश होगा कि उसने भाजपा की चाल को सफल नहीं होने दिया. बात भी सही है. शिबू सोरेन की सींची गई जमीन पर एक तरफ पार्टी थी तो दूसरी ओर परिवार. लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने और दुमका की जनता ने पार्टी को चुना और नलिन सोरेन को जीत दिला दी. इस सफलता के पीछे अगर पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन का नाम लिया जाएगा ,तो झारखंड के मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की भी चर्चा होगी.

    पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद माना जा रहा था कि  झारखंड मुक्ति मोर्चा के सामने नेतृत्व की चुनौती होगी, लेकिन बागडोर पार्टी के उपाध्यक्ष चंपई सोरेन ने संभाली. बहुमत साबित किया और फिर काम की शुरुआत कर दी. चंपई सोरेन चुनावी लड़ाई में भी उतरे. 100 से अधिक जनसभाएं कर झारखंड मुक्ति मोर्चा के कोर वोटरों को अपने पाले में किया. इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों के नामांकन में शामिल हुए. अन्य तरह से भी चुनाव प्रचार किया. यह अलग बात है कि झारखंड में कल्पना सोरेन बड़ा चेहरा बनकर उभरी है. पढ़ी-लिखी महिला है. झारखंड मुक्ति मोर्चा के समक्ष आई आपदा को जिस प्रकार अवसर के रूप में इस्तेमाल किया, इसका श्रेय कल्पना सोरेन को तो जाएगा ही. कल्पना सोरेन ने खुद विधानसभा का चुनाव लड़ते हुए 50 से अधिक बड़ी और 300 से अधिक छोटी सभाएं की. मुंबई से लेकर दिल्ली तक इंडिया गठबंधन के कार्यक्रम में हिस्सा लिया. यह बात अलग है कि इंडिया गठबंधन को आदिवासी सीटों पर ही फायदे हुए .हो सकता है कि अन्य सीटों पर उनकी रणनीति काम नहीं आई, लेकिन इतना तो कहा ही जा सकता है कि हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी को भुनाने में झारखंड मुक्ति मोर्चा और इंडिया गठबंधन पूरी तरह से सफल रहा.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो


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