रांची (RANCHI): झारखंड में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. यह मुद्दा अब सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजभवन और राज्य सरकार के बीच टकराव का रूप लेता दिख रहा है. राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सरकार की ओर से भेजी गई नियुक्ति संबंधी फाइल को दूसरी बार भी मंजूरी देने से इनकार करते हुए वापस कर दिया है.
इस बार राज्यपाल ने प्रस्तावित उम्मीदवारों की छवि और उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है. राजभवन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सूचना आयुक्त जैसे संवेदनशील पद के लिए चयनित व्यक्ति की छवि निष्कलंक और विश्वसनीय होनी चाहिए, क्योंकि यह पद पारदर्शिता और जवाबदेही से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है. सूत्रों के अनुसार, फाइल लौटाने से पहले राज्यपाल ने विधिक विशेषज्ञों से परामर्श लिया था. कानूनी राय के बाद उन्होंने राज्य सरकार से यह सवाल उठाया कि जिन व्यक्तियों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, उन्हें सूचना के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी कैसे सौंपी जा सकती है.
राज्य सरकार द्वारा भेजे गए चार नामों में अमूल्य नीरज खलखो को लेकर सबसे ज्यादा आपत्ति सामने आई है. जानकारी के मुताबिक, उनके खिलाफ पांच मामले दर्ज हैं. इसके अलावा तनुज खत्री के खिलाफ भी एक मामला दर्ज होने की बात कही जा रही है. राजभवन को मिली कुछ लिखित शिकायतों में यह भी उल्लेख किया गया है कि ऐसे नामों की अनुशंसा सूचना के अधिकार अधिनियम की मूल भावना के विपरीत है और यह सूचना का अधिकार अधिनियम के उद्देश्यों के साथ-साथ सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का भी उल्लंघन कर सकता है.
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राज्य सरकार और राजभवन के बीच मतभेद और गहराने की संभावना जताई जा रही है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है, क्या वह नए नामों के साथ संशोधित प्रस्ताव भेजेगी या फिर अपने पुराने प्रस्ताव पर कायम रहेगी. यह विवाद आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी असर डाल सकता है.


