जमशेदपुर में सजेगा आदिवासी संस्कृति का रंगमंच, जोहार नाइट में दिखेंगे कई कलाकार

    Janshedpur news:जमशेदपुर के बिस्टुपुर स्थित गोपाल मैदान और सुंदरनगर के तुरामडीह में आदिवासी संस्कृति की रंगीन झलकियों से सराबोर होने जा रहा है. जोहार ट्रस्ट के तत्वावधान में 11-12 अप्रैल को  राष्ट्रीय मागे महोत्सव का आयोजन किया जाएगा, इसमें देशभर के आदिवासी समुदाय एक मंच पर अपनी संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे

    जमशेदपुर में सजेगा आदिवासी संस्कृति का रंगमंच, जोहार नाइट में दिखेंगे कई कलाकार

    जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): जमशेदपुर के बिस्टुपुर स्थित गोपाल मैदान और सुंदरनगर के तुरामडीह में आदिवासी संस्कृति की रंगीन झलकियों से सराबोर होने जा रहा है. जोहार ट्रस्ट के तत्वावधान में 11-12 अप्रैल को  राष्ट्रीय मागे महोत्सव का आयोजन किया जाएगा, इसमें देशभर के आदिवासी समुदाय एक मंच पर अपनी संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे. इस दो दिवसीय महोत्सव में झारखंड सहित 11 राज्यों से आए जनजातीय कलाकार पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और वाद्य संगीत के जरिए अपनी सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रदर्शन करेंगे. रंग-बिरंगे परिधानों, ढोल-नगाड़ों की थाप और पारंपरिक लय के बीच दर्शकों को आदिवासी जीवन शैली की असली झलक देखने को मिलेगी. शुक्रवार को गोलमुरी भवन में जोहार ट्रस्ट की ओर से प्रेस वार्ता आयोजित कर इसकी जानकारी दी है. कहा गया कि आयोजन की तैयारी पूरी कर ली गई है. 

    100 स्टॉल लगाए जाएंगे

    मागे परब के दौरान गोपाल मैदान में 100 स्टॉल भी लगाए जाएंगे. इन स्टालों में देसी जड़ी-बूटियों, आदिवासी व्यंजनों, हस्तशिल्प, परिधान और कला-साहित्य के साथ आधुनिक उत्पाद भी उपलब्ध होंगे. कार्यक्रम की शुरुआत 11 अप्रैल को तुरामडीह क्लब में जोहार संवाद से होगी. इसमें समाज के विशिष्ट योगदानकर्ताओं को सम्मानित किया जाएगा और आदिवासी संस्कृति, परंपरा व सामाजिक मुद्दों पर चर्चा होगी. वहीं 12 अप्रैल को मागे सूसून नृत्य प्रतियोगिता गोपाल में आयोजित होगी.  प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा.महोत्सव का ग्रैंड फिनाले और भी खास होगा. इसमें देशभर के टॉप 15 डांसर्स अपनी प्रस्तुति देंगे.

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    मानकी-मुंडा, माझी बाबा होंगे सम्मानित

    जोहार ट्रस्ट के सचिव दुर्गा चरण बारी ने कहा कि कार्यक्रम में बॉलीवुड और पूर्वी भारत के जनजातीय संगीत से जुड़े कलाकार प्रस्तुति देंगे. कार्यक्रम में मानकी-मुंडा, दिऊरी और माझी बाबाओं को सम्मानित किया जाएगा. यह महोत्सव सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, भाषा, परंपरा और पहचान को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक सशक्त प्रयास है. कार्यक्रम सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव की भावना को नई ऊर्जा देगा.

    रिपोर्ट-रोहित सिंह


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