धनबाद में बोले सीएम -उठा लीजिये शिक्षा का हथियार, चल दीजिये सरकार के साथ,फिर देखिये कैसे बदल जाएगी सूरत!


धनबाद(DHANBAD): झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज धनबाद में थे. झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे. मंच से उन्होंने गुरु जी की तर्ज पर लोगों से अपील की कि शिक्षा पर ध्यान रहे, बच्चों को पढ़ाइए, शिक्षा में कोई कटौती नहीं होनी चाहिए। झारखंड सरकार बच्चों की शिक्षा के लिए कई सुविधाएं लेकर आई है. निशुल्क कोचिंग की सुविधा दी जा रही है. अपने बच्चों को ऐसा तैयार करें कि वह देश- दुनिया की किसी भी प्रतियोगिता में छाती ठोककर हिस्सा ले सके. उन्होंने कहा कि बड़ी मुश्किल से अलग राज्य मिला है, बहुत कठिनाई से सत्ता मिली है.
झारखंड विरोधी लोगों को कभी प्रश्रय मत दीजिये। राजनीतिक रूप से खुद को मजबूत करिए, अभी निकाय चुनाव होने जा रहा है, फिर पंचायत चुनाव भी होगा। इसमें अपनी एकजुटता बनाए रखिये। हमें काम ऐसा करना है कि गांव भी हमारा रहे और शहर भी हमारा हो. राजनीतिक ताकत को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार ऐसी व्यवस्था बना रही है कि अधिकारी अब घर-घर पहुंचेंगे, अधिकारी के पास कोई नहीं जाएगा। इसमें थोड़ा वक्त लग सकता है लेकिन यह काम होकर ही रहेगा। उन्होंने कोयला कंपनियों को भी चुनौती दी और कहा कि आजकल आउटसोर्स के जरिए बाहर से मजदूरों को झारखंड में लाने की कोशिश की जा रही है.
हमने कानून बनाया है कि 75% स्थानीय लोगों को नियुक्ति देना होगा। आप यह नौकरी पाने के लिए आंदोलन करिए, जरूरत पड़े तो कब्जा कर लीजिए, लेकिन अपना अधिकार लेकर ही रहिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे मार्गदर्शक आदरणीय शिबू सोरेन जी हमारे बीच में नहीं है. उन्होंने जो रास्ता दिखाया है, वह आसान नहीं है, लेकिन एक न एक दिन हम मंजिल जरूर प्राप्त करेंगे। ऐसा मेरा विश्वास है. उन्होंने कहा कि झारखंड को मजदूर राज्य बना दिया गया है. दूसरे राज्यों का विकास हो रहा है और उस विकास में झारखंड के मजदूर काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई अधिकार वहां नहीं मिलता। झारखंड को ईश्वर ने इतना कुछ दिया है कि अगर सब कुछ ठीक से किया गया होता ,तो यह देश का नंबर एक राज्य होता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोबिड के समय ही उन्हें पता चला कि झारखंड के 30 लाख से भी अधिक लोग नौकरी के लिए बाहर जाते हैं. कोविड में देखा गया कि सबको सड़क पर छोड़ दिया गया. झारखंड सरकार ने हवाई जहाज से मजदूरों को प्रदेश में लाने का काम शुरू किया, तो दूसरे राज्य भी इसे करने लगे. उन्होंने असम और सिलीगुड़ी चाय उद्योग की चर्चा करते हुए कहा कि वहां का चाय उद्योग आदिवासियों के भरोसे चलता है. बहुत साल पहले झारखंड, बंगाल, छत्तीसगढ़, ओड़िशा से आदिवासियों को बंदूक के नोक पर ले जाया गया और वहां ले जाकर पटक दिया गया. लेकिन अब उनके लिए भी काम होगा। धनबाद के मंच से उन्होंने केंद्र सरकार को भी आड़े हाथों लिया। कहा कि महंगाई इतनी अधिक है कि लोगों का जीवन यापन दूभर हो गया है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
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