थाना या ब्लॉक में अधिकारी पैसे की करें डिमांड तो सीधे करें कॉल, DGP ने जारी किया नंबर

    थाना या ब्लॉक में अधिकारी पैसे की करें डिमांड तो सीधे करें कॉल, DGP ने जारी किया नंबर

    रांची(RANCHI): झारखंड अलग राज्य बने 24 साल हो गए. अपना झारखंड बदहाल है. यहां के लोग बेहाल है. लड़ कर अलग राज्य तो ले लिया बावजूद अपने हक और अधिकार के लिए सरकारी दफ्तर का चक्कर काटते है. बिना पैसा दिए कोई काम नहीं होता है. चाहे जन्म प्रमाण पत्र से लेकर मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए एक फिक्स रकम सेट की गई है. थाना हो या ब्लॉक सभी जगह पैसा बिना कोई काम नहीं होता है. लेकिन अब झारखंड के मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया है. जिससे झारखंड के लोगों का काम बिना किसी रिश्वत के हो सके. सीएम के आदेश के बाद ACB अलर्ट हो गई. खुद DGP ने मोबाईल नंबर जारी कर दिया. अगर किसी भी दफ्तर में घूस की मांग की जाती है तो बिना किसी डर के फोन पर शिकायत कर सकते है.

    सीएम के आदेश के बाद राज्य केDGP एक्शन में दिखे. पहले ही दिन एसीबी की कार्रवाई से घुसखाओर में हड़कंप मच गया. साथ ही इसके बाद मोबाइल नंबर जारी कर दिया. जिससे कोई भी आम इंसान घूसखोर की जानकारी बिना किसी डर के फोन पर दे सकते है. 9431105678,06512710001या 1064 पर कॉल कर शिकायत की जा सकती है.  

    अगर देखें तो अलग राज्य के समय आंदोलनकारियों ने एक सपना देखा था जिसमें खुशहाल झारखंड हो. एक ऐसा राज्य बने जहां गरीब अमीर सभी को अपना अधिकार मिले. लेकिन वह सपना चूर हो गया. अधिकारियों ने एक रेट चार्ट तैयार कर लिया और राज्य के सभी दफ्तर में एक रेट तय हो गया. अगर आप जन्म, मृत्यु, स्थानीय और जमीन से जुड़े मामले में ब्लॉक या अंचल कार्यालय में आवेदन देते है तो बिना पैसा के कोई काम नहीं होता है.

    यहां तक कि जिस मामले में थाना का दूर-दूर तक कोई काम नहीं. उसमें भी थाना में कमीशन लिया जाता है. एक केस करने के नाम पर भी पैसे की डिमांड की जाती है. इतना तो छोड़िए झारखंड में ठेकेदार को काम लेने के लिए भी पैसे विभागीय अधिकारी और नेताओं को देना पड़ता है. कोई भी काम बिना पैसे के होना मुश्किल होता है.

    झारखंड को घूसखोरी का अड्डा बनाने में यहां के अधिकारियों की बड़ी भूमिका है. सरकारी दफ्तर में बैठ कर जनता के टैक्स के पैसे से अपनी सैलरी लेते है फिर उसी जनता के काम करने के लिए मोटी रकम की मांग करते है. आज हालत ऐसी है कि किसी भी दफ्तर में बिना पैसे के घुसना ही गुनाह जैसा है. यह कहे तो गलत नहीं होगा की हरिश्चंद्र की सभी कहानी झारखंड में फिट बैठती है.

     


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