लोबिन पर झामुमो की नाराजगी बनी रही तो चमरा पर क्यों रहा झामुमो का सॉफ्ट कॉर्नर,पढ़िए इस रिपोर्ट में

    लोबिन पर झामुमो की नाराजगी बनी रही तो चमरा पर क्यों रहा झामुमो का सॉफ्ट कॉर्नर,पढ़िए इस रिपोर्ट में

    धनबाद(DHANBAD): चुनाव के पहले पट्टा बदलने का खेल पुराना है. नाराज को मनाने की कवायत भी खूब होती है. झारखंड मुक्ति मोर्चा को चुनौती देकर निर्दलीय लोकसभा चुनाव लड़ने वाले चमरा लिंडा जल्द ही झामुमो के बिशुनपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार घोषित किए जा सकते हैं. जल्द ही पार्टी से उनका निलंबन भी वापस लिया जा सकता है.

    भाजपा लोबिन को बोरियो से विधानसभा चुनाव का टिकट दे सकती है

    चमरा लिंडा और लोबिन हेंब्रम के खिलाफ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने एक साथ कार्रवाई की थी. चमरा लिंडा को सिर्फ पार्टी से निलंबित किया गया था. जबकि लोबिन हेंब्रम को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. लोबिन हेंब्रम ने भी निर्दलीय लोकसभा का चुनाव लड़ा था. वह अब भाजपा में आ गए हैं और झारखंड मुक्ति मोर्चा को पानी पी पी कर कोस रहे हैं. हो सकता है कि भाजपा उन्हें बोरियो से विधानसभा चुनाव का टिकट दे.

    शुक्रवार को आजसू और भाजपा को झटका देते हुए उमाकांत रजक और केदार हाजरा झामुमो में शामिल हो गए. उमाकांत रजक को झारखंड मुक्ति मोर्चा प्रतिपक्ष के नेता अमर कुमार बाउरी  के खिलाफ चुनाव में उतरेगा .केदार हाजरा को जमुआ से गठबंधन का प्रत्याशी बनाया जा सकता है. केदार हाजरा जमुआ से तीन बार के विधायक रहे हैं. इस बार झारखंड में एनडीए और इंडिया ब्लॉक के लिए एक एक सीट महत्वपूर्ण है. एनडीए की सूची भी इसीलिए लटकी हुई है कि कुछ नाराजगी को दूर करने की कोशिश की जा रही है. शुक्रवार को एनडीए में सीट शेयरिंग की घोषणा कर दी गई. लेकिन इसके पहले रूसने और मनाने का खेल भी हुआ. कहा जाता है की टुंडी सीट को लेकर सुदेश महतो नाराज थे. उन्हें मनाने के लिए चुनाव सह प्रभारी हेमंत विश्व शरमा उनके घर गए. घंटों बातचीत हुई, फिर तय हुआ कि टुंडी में जो मजबूत होगा, वहीं चुनाव लड़ेगा. वैसे घोषणा में टुंडी सीट आजसू के खाते में नहीं दी गई है.

    एनडीए झारखंड के एक एक सीट की गणना कर रहा है तो झारखंड मुक्ति मोर्चा भी सभी विवादों को खत्म करते हुए चुनाव में उतरने की तैयारी में है. चमरा लिंडा की सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से लंबी बातचीत हुई है. बातचीत में गिले शिकवे दूर हो गए हैं और चमरा लिंडा फिर से झामुमो से चुनाव लड़ेंगे. यह बात भी सच है कि संथाल  के जो भी नेता भाजपा में गए ,उन्हें सफलता नहीं मिली. देखना दिलचस्प होगा कि लो बि न हेंब्रम को आगे किस हद तक सफलता मिलती है. हेमलाल मुर्मू, स्टीफन मरांडी को उदाहरण के रूप में गिना जा सकता है.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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