DHANBAD: हमहूं भूखल बानी वट सावित्री अपने सत्यवान खातिर हो से गूंज रहा इलाका 

    DHANBAD: हमहूं भूखल बानी वट सावित्री अपने सत्यवान खातिर हो से गूंज रहा इलाका 

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद कोयलांचल  मिक्स्ड  कल्चर  का जीता -जगता उदहारण है. देश का पूर्वी भाग हो , पश्चिम हो या  उत्तर  अथवा दक्षिण, सभी जगह मनाए जाने वाले त्योहार की झलक धनबाद कोयलांचल में दिखती है. शुक्रवार को कोयलांचल के वट  वृक्ष के नीचे महिलाओं की अच्छी तादाद देखी गई. आज सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु की कामना के लिए वट सावित्री की पूजा करती है. सुहागिनों के लिए यह पूजा विशेष महत्व रखता है. मान्यता यह भी है कि बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है. यही वजह है कि सावित्री ने इसी पेड़ के नीचे बैठकर अपने मृत पति के प्राण  यमराज से छीन कर जीवित कराया था. वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा जी, तने में विष्णु और पत्तों में शिव का वास होता है. इसके नीचे पूजन और  व्रत कथा सुनने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती है. ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को वट सावित्री का व्रत रखा जाता है. 

    पूरे विधि-विधान से हो रही पूजा 
     
    आज के दिन महिलाएं पूरे विधि-विधान से वट बृक्ष  की पूजा करती है . व्रत रखने वाली महिलाएं बरगद के पेड़ को जल,फल,फूल चढ़ा कर कुमकुम,अक्षत लगाती हैं और पेड़ के चारों तरफ परिक्रमा कर कच्चा सूत बांधती हैं. इस दिन सती सावित्री की कथा सुनना बहुत ही शुभ माना गया है. महिलाओं की माने तो आज के दिन वट सावित्री की पूजा करने से पति की दीर्घायु के साथ पूरे परिवार में सुख,शांति और समृद्धि मिलती है. इस व्रत में महिलाएं सावित्री के समान अपने पति की दीर्घायु की कामना तीनों देवताओं से करती हैं, ताकि उनके पति निरोग और दीर्घायु  हो. परिवार में सुख ,शांति बनी रहे. हालांकि अन्य त्योहार की भांति इस पर भी महगाई की मार दिखी. वैसे तो ऐसे मौको को भजाने के लिए बाजार तैयार बैठा रहता है. बाजार में फल, फूल ही नहीं, वट  वृक्ष के डाली और पत्ते तक खूब बिके.  

     रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  


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