ताले में बंद धनबाद जिला कांग्रेस कार्यालय की तक़दीर अपने साथ औरों की भी कैसे बदल देगी किस्मत, पढ़िए

    ताले में बंद धनबाद जिला कांग्रेस कार्यालय की तक़दीर अपने साथ औरों की भी कैसे बदल देगी किस्मत, पढ़िए

    धनबाद (DHANBAD): धनबाद का कांग्रेस कार्यालय 15 वर्षों से ताले में बंद है. फिलहाल वहां सांप और बिच्छू लोट रहे हैं. जंगल उग आए है. यह कार्यालय 2011 से बंद है. दरअसल,धनबाद जिला परिषद ने अपनी संपत्तियों को वापस लेने के लिए कोर्ट में मामला दायर किया था. कोर्ट का फैसला जिला परिषद के पक्ष में आया था. उसके बाद जिला परिषद की जमीन पर संचालित कांग्रेस, इंटक और आईएमए के कार्यालय को सील कर दिया गया था. सील तो यूनियन क्लब भी हुआ था लेकिन संचालको ने कोर्ट की अनुमति से इसे खोलवा लिया। कांग्रेस के लोग पिछड़ गए.  

    शनिवार को जिला परिषद बोर्ड की हुई विशेष बैठक में चर्चा 

    लेकिन शनिवार को जिला परिषद बोर्ड की हुई विशेष बैठक में इस पर सकारात्मक चर्चा हुई है और हो सकता है कि अगली बैठक में कांग्रेस कार्यालय को खोलने पर सहमति बन जाए. दरअसल, धनबाद का कांग्रेस कार्यालय पिछले 15 साल वर्षों से धनबाद से लेकर रांची और रांची से लेकर दिल्ली तक के कांग्रेस नेताओं की परीक्षा ले रहा है. 2019 से कांग्रेस झारखंड सरकार में शामिल है, उसके कई बड़े छोटे नेता धनबाद से लेकर रांची तक बयान दे चुके हैं कि कांग्रेस कार्यालय खुलवाना उनकी प्राथमिकता है. यहां तक कि  कांग्रेस के पूर्व झारखंड प्रभारी ने तो कांग्रेस कार्यालय के सामने हुई एक सभा में ऐलान किया था कि बहुत जल्द कांग्रेस कार्यालय खुल जाएगा. 

    कांग्रेस ऑफिस में लगा ताला, कई की जुवान पर भी लगा दिया है ताला
     
    पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता जब भी धनबाद आते थे, कांग्रेस कार्यालय खोलने की बात होती थी. सूत्र बताते हैं कि एक बार तो कांग्रेस कार्यालय में लगे ताले को भी तोड़ने की कोशिश हुई, लेकिन सफलता नहीं मिली. दरअसल, कांग्रेस कार्यालय में बंद ताला हाल के दिनों में कई नेताओं की जुबान पर भी ताला लगा दिया है. कांग्रेस कार्यकर्ता भी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर सरकार में शामिल होने के बावजूद कांग्रेस कार्यालय में ताला बंद क्यों है? कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ताओं ने भी अनिल पांडे के नेतृत्व में कार्यालय खुलवाने के लिए अनशन कर चुके हैं. लेकिन अभी तक ताला खुला  नहीं है. 

    यह एक कार्यालय ही नहीं, बल्कि कांग्रेस की धरोहर भी है 
     
    यह अलग बात है कि यह कार्यालय सिर्फ कार्यालय ही नहीं, बल्कि कांग्रेस की धरोहर भी है. इस कार्यालय में प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी भी आ चुकी हैं. जिस समय यह कार्यालय बना, उस समय कोयलांचल में कांग्रेस बहुत समृद्ध थी. 2011 में बंदी के बाद कांग्रेस के जिला अध्यक्षों पर भी ध्यान नहीं देने के आरोप लगाते रहे हैं. कांग्रेस की जिला स्तर पर अंदरूनी राजनीति की वजह से भी कांग्रेस कार्यालय का ताला नहीं खुल पाया है. बेरमो के विधायक अनूप सिंह ने भी कुछ महीने पहले घोषणा की थी कि ताला वह खुलवाकर ही दम लेंगे, लेकिन उनके समय का भी डेड लाइन पार कर गया, फिर भी ताला नहीं खुला. अब एक बार फिर संभावना बनी है. देखना दिलचस्प होगा कि ताला कब खुलता है, किन शर्तों पर खुलता है.



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