ममता दीदी के झटके से कैसे उबर पायेगा इंडिया गठबंधन!तृणमूल के लिए भी 22 सीटों को बचाना बड़ी चुनौती,पढ़ें बंगाल चुनाव का ग्राउंड परिदृश्य 

    ममता दीदी के झटके से कैसे उबर पायेगा इंडिया गठबंधन!तृणमूल के लिए भी 22 सीटों को बचाना बड़ी चुनौती,पढ़ें बंगाल चुनाव का ग्राउंड परिदृश्य 

    धनबाद(DHANBAD):बंगाल में खेला हो गया.ममता बनर्जी ने कांग्रेस सहित इंडिया गठबंधन को आइना दिखा दिया. उन्होंने बंगाल में 2024 का चुनाव अकेले ही लड़ने का फैसले के सबूत पेश कर दिए. यह बात जरूर है कि उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव से उनकी बात चल रही है . हालाकि कांग्रेस को अभी भी उम्मीद है.वह कहती है कि नाम वापसी के पहले कुछ भी हो सकता है. यहां सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी गठबंधन नहीं होने के कारण बने या और कोई अदृश्य कारण हैं.अधीर रंजन लगातार ममता दीदी पर हमले कर रहे हैं.2019 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल के 22 सांसद हैं.बीजेपी के 18,कांग्रेस के दो और वाम दल के शून्य सांसद हैं.

    अब बंगाल में लगभग हर एक सीट पर चतुष्कोणीय मुकाबला होगा

    रविवार को बंगाल के कुल 42 सीटों पर उम्मीदवार की घोषणा के बाद तो अब यह साफ हो गया है कि गठबंधन पूरी तरह से टूट गया है और अब बंगाल में लगभग हर एक सीट पर चतुष्कोणीय मुकाबला होगा. इस मुकाबले में तृणमूल कांग्रेस, बीजेपी ,कांग्रेस और वामदल शामिल रहेंगे. सवाल उठता है कि ऐसा होने से सबसे अधिक फायदा किसको मिलेगा. बीजेपी पूरी दमखम के साथ चुनाव में उतरने का संकेत दे चुकी है. संदेशखाली को मुद्दा बनाने का हर प्रयास किया जा रहा है. बीजेपी महिलाओं के अस्मिता से जोड़कर लोगों तक पहुंच रही है. इधर तृणमूल कांग्रेस के बारे में भी कहा जाता है कि वह भी चुनाव जीतने की रणनीति में बदलाव किया है. 16 मौजूदा सांसदों को टिकट दिया गया है. सिने स्टार शत्रुघ्न सिन्हा उर्फ़ बिहारी बाबू को आसनसोल से लड़ाया जाएगा.  जबकि पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद को भी टिकट दिया गया है.  तो कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के खिलाफ तृणमूल ने पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान को चुनाव में उतारने का निर्णय ले लिया है .

    बंगाल में गठबंधन नहीं होना इंडिया ब्लॉक को बड़ा झटका है

    अब सवाल उठता है कि  तृणमूल कांग्रेस क्या अपने 2019 के रिकॉर्ड को लांघ सकेगी या उसे आगे बढ़ेगी या फिर बीजेपी 2019 की 18 सीटों पर काबिज रहेगी या फिर आगे बढ़ेगी. यह बात ,तो तय है कि बंगाल में अगर गठबंधन हो जाता तो बीजेपी को थोड़ी मुश्किल होती. क्योंकि डायरेक्ट फाइट होने पर वोटो के बंटवारे की संभावना नहीं रहती है.कांग्रेस कहती रही की ममता बनर्जी से उनकी बात चल रही है और वह गठबंधन में शामिल होंगी. लेकिन ममता बनर्जी ने पहले ही कह दिया था कि वह अकेले चुनाव लड़ेगी और ऐसा ही हुआ. बंगाल में गठबंधन नहीं होना इंडिया ब्लॉक को बड़ा झटका है, क्योंकि उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पंजाब ,महाराष्ट्र सहित अन्य कुछ राज्यों में ही गठबंधन अस्तित्व में है .बंगाल में लोकसभा की कुल 42 सेंटर हैं. ऐसे में बंगाल में बीजेपी को रोकने के लिए कांग्रेस उम्मीद लगाए बैठी थी कि ममता दीदी के साथ सीट शेयरिंग हो जाएगा. यह बात अलग है कि बंगाल के चुनाव का अपना कुछ अलग मिजाज है.झारखंड, बिहार और यूपी से अलग पश्चिम बंगाल में चुनाव होते हैं. अब देखना दिलचस्प होगा कि 2024 का चुनाव बंगाल में क्या परिणाम देता है .एनडीए को फायदा होता है अथवा ममता बनर्जी कुछ अधिक सीट लेकर राष्ट्रीय राजनीति में उभारेंगी. 

    देखना दिलचस्प होगा कि गठबंधन नहीं होना किसके हित में साबित होता है

    वैसे नीतीश कुमार के एनडीए में शामिल हो जाने के बाद भी इंडिया गठबंधन को झटका लगा था. लेकिन बंगाल में गठबंधन टूटना इंडिया ब्लॉक के लिए परेशानी बन सकता है. कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी के खिलाफ पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान को उतारने के बाद उनकी पहली प्रतिक्रिया है कि तुष्टिकरण की राजनीति के लिए ऐसा किया गया है. राहुल राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा जब बंगाल होकर गुजरी तो उम्मीद बंधी थी कि गठबंधन किसी न किसी शर्त पर हो जाएगा लेकिन नहीं हुआ. अब देखना दिलचस्प होगा कि गठबंधन नहीं होना किसके हित में साबित होता है. 

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो


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