कब तक हाथी लेते रहेंगे लोगों की जानें, एलीफेंट कॉरिडोर की योजना क्यों नहीं उतर रही जमीन पर, पढ़िए पड़ताल करती इस रिपोर्ट में 

    कब तक हाथी लेते रहेंगे लोगों की जानें, एलीफेंट कॉरिडोर की योजना क्यों नहीं उतर रही जमीन पर, पढ़िए पड़ताल करती इस रिपोर्ट में 

    धनबाद (DHANBAD) : हाथी अब साथ ही नहीं रहे. लगातार लोगों की जानें ले रहे हैं. हाथियों का झुंड अब गिरिडीह धनबाद मुख्य सड़क पर पहुंच गया है. बुधवार की देर शाम को हाथियों के झुंड को मुख्य सड़क पार करते हुए देखा गया है. इस रास्ते से सैकड़ों वाहन गुजरते हुए गिरिडीह, देवघर और बिहार की ओर जाते हैं. वन विभाग की टीम मशालची की मदद से झुंड को खदेड़ ते हुए जंगल की ओर भेज दिया है. धनबाद के वन विभाग का कहना है कि हाथियों का झुंड अभी ऋषिभीठा में डेरा जमाए हुए हैं. वहां विभाग का चेक डैम है. हाथियों का झुंड अपनी प्यास बुझाने के लिए उसी के आसपास डेरा जमाए हुए हैं. वन विभाग की टीम इस पर नजर बनाए हुए हैं. वन विभाग ने आसपास के ग्रामीणों से अपील की है कि अंधेरा होने पर घरों से नहीं निकले. साथ ही अगर कहीं हाथियों का झुंड दिख जाए तो उसे छेड़ने की कोशिश नहीं करें. इसके पहले सोमवार को हाथियों के झुंड ने पूर्वी टुंडी में उत्पात मचाया था.

    2 दर्जन से अधिक हाथियों का झुंड मचा रहा उत्पात

    बता दें कि  इस झूडं में 2 दर्जन से अधिक हाथी हैं. वैसे धनबाद के टुंडी और तोपचांची के जंगलों में हाथियों का राज चलता है. हर साल हाथी पहुंचते हैं .फसल से लेकर घरों तक को नुकसान पहुंचाते हैं. धनबाद के 2 प्रखंडों के लिए हाथी बड़ी समस्या बन गए हैं. वन विभाग के पास इसके कोई स्थाई समाधान नहीं है. जामताड़ा से पूर्वी टुंडी के रास्ते हाथियों का झुंड हर साल धनबाद जिले में प्रवेश करता है. वन विभाग के पास सुरक्षा के नाम पर  मशालचियो का एक दल है ,जो हाथियों को आबादी से दूर रखने के लिए जंगलों में तैनात रहता है. हाल के दिनों में पूरे झारखंड सहित धनबाद में हाथियों का आतंक कुछ अधिक बढ़ गया है. हाथियों के लिए कॉरिडोर बनाने की योजना दो दशक से लटकी हुई है. विभाग ने प्रस्ताव बनाकर भेजा था लेकिन पहल नहीं हुई. टुंडी, जामताड़ा और गिरिडीह को मिलाकर हाथियों के चलने के लिए एक रास्ता चिन्हित करने की तैयारी थी लेकिन यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ा. बात सिर्फ यही  नहीं है झारखंड में एलीफेंट कॉरिडोर पर बातें तो बहुत हुई लेकिन कोई काम नहीं हुआ. यही वजह है कि झारखंड में लगभग हर दिन हाथियों का हमला हो रहा है. हाथियों के हमले से मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है. हाथी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं. घरों को तोड़ रहे हैं .बढ़ते खनन ,नई-नई चौड़ी हाई स्पीड सड़कें और आबादी बढ़ने से हाथियों के चिन्हित रास्तों पर अतिक्रमण तेजी से बढ़ रहा है. जिस कारण यह समस्या बढ़ रही है.

    रास्ता भटक गया हाथियों का झुंड

    जानकारों के अनुसार हाथियों का झुंड अपना रास्ता भटक रहा है और आदमी और हाथियों के बीच टकराव बढ़ रहा है. झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिसा में खनन की वजह से हाथियों के कई पुराने रास्ते बंद हो गए हैं .जानकारों के अनुसार हाथियों की स्मरण शक्ति अधिक होती है. पीढ़ी दर पीढ़ी वह अपने आवागमन के रास्ते को याद रखते हैं. पारंपरिक रास्तों पर चलना उन्हें ज्यादा पसंद है. क्योंकि उन्हें पता होता है कि कहां खाना, पानी मिलेगा, कहां विश्राम कर सकते हैं .यही वजह है कि मार्ग में अतिक्रमण हाथी बर्दाश्त नहीं करते .रास्ते में पड़ने वाली बाधाओं को पार करते हुए आगे बढ़ते हैं. हालांकि वह  वैकल्पिक रास्तों की भी तलाश करते हैं, और इसी कड़ी में उन गांव तक पहुंच जाते हैं, जहां पहले कभी नहीं गए थे. ऐसे में गांव के लोग बचाव में जुड़ जाते हैं और उसके बाद हाथी उन पर हमला बोल देते हैं. यह क्रम दशकों से चल रहा है लेकिन एलिफेंट कॉरिडोर बनाने की योजना धरातल पर नहीं उतर रही है.

    रिपोर्ट : सत्यभूषण सिंह, धनबाद


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