जमशेदपुर का "हिस्ट्रीशीटर" विक्रम शर्मा धनकुबेर बनने के बाद कैसे अब राजनीति में "पींगें" बढ़ा रहा था, पढ़िए

    जमशेदपुर का "हिस्ट्रीशीटर" विक्रम शर्मा धनकुबेर बनने के बाद कैसे अब राजनीति में "पींगें" बढ़ा रहा था, पढ़िए

    TNP DESK-झारखंड का "हिस्ट्रीशीटर" विक्रम शर्मा जब जीवित था, तो उसकी चर्चा सीमित थी.  सीमित इसलिए भी थी कि वह पर्दे  के पीछे रहकर काम करता था.  जमशेदपुर में संगठित गिरोह चलाने में उसका नाम जरूर चर्चा में था, लेकिन उसकी हत्या के बाद विक्रम शर्मा की चर्चा झारखंड से लेकर उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश तक हो रही है.  मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उसने अकूत संपत्ति अर्जित की है.  संपत्ति अर्जित करने के बाद जब वह धनकुबेर बन गया, तब उसकी ललक  राजनीति में किस्मत आजमाने की हुई. सूत्रों के अनुसार  वह झारखंड और उत्तराखंड में अपनी राजनीतिक रसूख  बढ़ाने की लगातार कोशिश कर रहा था.  राजनीतिक दलों से भी उसके संपर्क थे.  सूत्रों के अनुसार झारखंड के एक लोकल बॉडीज के अध्यक्ष पद की कुर्सी पर उसकी नजर थी और वह इसके लिए लॉबिंग  भी कर रहा था.  उत्तराखंड और जमशेदपुर उसका लगातार आना-जाना होता था. 

    जमशेदपुर में तो वह चौकन्ना रहता था, गाड़ियों का काफिला उसके साथ होता
     
    जमशेदपुर में तो वह चौकन्ना रहता था, गाड़ियों का काफिला उसके साथ होता, लेकिन देहरादून में वह  थोड़ा निश्चित रहता था और शायद यही वजह है कि उसकी हत्या के लिए देहरादून का स्थान अपराधियों ने चुना।  देहरादून में भी सत्ता के गलियारों  में भी उसने अपनी पैठ  बना ली थी.  जनप्रतिनिधियों के साथ भी दोस्ती गांठ ली थी.  एक तरह से देहरादून में उसे "सेफ शेल्टर"  मिल गया था और स्टोन क्रेशर के कारोबारी के रूप में वह पहचान बना लिया था.  शुक्रवार को जब देहरादून में विक्रम शर्मा की हत्या हुई तो भागने के लिए अपराधियों  में बहुत हड़बड़ी नहीं थी.  मतलब साफ है कि "शार्प  शूटरों"  ने यह काम किया। झारखंड के जमशेदपुर के "हिस्ट्रीशीटर " विक्रम शर्मा की हत्या "ऑन द स्पॉट क्लोज किलिंग" थी.  बहुत नजदीक से विक्रम शर्मा को शूटरों  ने गोली  मारी थी.  

    एक गोली विक्रम शर्मा को सिर में सटाकर मरी गई थी ,परिणाम हुआ कि ...

    सूत्र बता रहे हैं कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक एक गोली विक्रम शर्मा के सिर में सटाकर  मारी गई थी, जो मौत का मुख्य कारण बनी , दो गोली शरीर के आगे- पीछे की दिशा में आर- पार हुई थी.  मतलब साफ है कि शूटरों  ने टारगेट को बिल्कुल नजदीक से कंफर्म किया और उसके बाद फायरिंग की.  जानकार लोग बताते हैं कि ऐसा बहुत ही शातिर और "शार्प शूटर" ही कर सकते हैं.  यह भी  कहा जा रहा है कि गोली चलाने की दूरी बहुत कम थी.  सिर  में सटाकर गोली मारने से अंदाज लगाया जा रहा है कि शूटर बिल्कुल नजदीक पहुंचकर फायरिंग की होगी। भागने के लिए बदमाशों ने मुख्य  रोड की बजाय दूसरा रास्ता चुना, सूत्र बताते हैं कि विक्रम शर्मा की हत्या की प्लानिंग ठोस और सही टाइमिंग में की गई थी.  उनके   पास विक्रम शर्मा के घर से निकलने से लेकर जिम में बिताए जाने वाले वक्त का पूरा डिटेल था.   हत्या करने के बाद भागने का रास्ता अपराधियों ने पहले ही चुन लिया था.  सूत्र तो यह भी बता रहे हैं कि शुक्रवार की सुबह विक्रम शर्मा जैसे ही घर से निकला, शूटर उनके पीछे लग गए थे. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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