कोयलांचल में अपराध का इतिहास: किसने कराई थी ऑडिटर एसएस दास की हत्या,क्यों हिल गया था बंगाल -बिहार

    कोयलांचल में अपराध का इतिहास: किसने कराई थी ऑडिटर एसएस दास की हत्या,क्यों हिल गया था बंगाल -बिहार

    धनबाद(DHANBAD):  कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण के बाद धनबाद कोयलांचल में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ा , तरह-तरह के क्राइम किए जाने लगे.  बाहर से अपराधियों को बुलाकर कत्ल और दबदबा कायम करने का "खेल" शुरू हो गया था.  राष्ट्रीयकरण के बाद धनबाद कोयलांचल  में बालू "कमाई" का एक बड़ा जरिया बन गया था.  बालू के तो कई ठेकेदार थे, लेकिन सबकी पीठ पर किसी न किसी माफिया का हाथ होता था.  यही वजह है कि बीसीसीएल के अधिकारी भी भय  खाते थे और उनके हर नाजायज बिल को भी रोकने की साहस नहीं करते थे. 

    टेबल पर पिस्टल रखकर पास कराये जाते थे विपत्र 

     पुराने लोग बताते हैं कि अधिकारियों के टेबल पर दबंग लोग  पिस्टल रख देते थे, फिर उन्हें कुछ लालच भी देते थे और कहते थे कि दोनों में से जो चुनना हो  चुन लो.  बिल  तो हम पास कर करा  ही लेंगें।  इसके बाद तो कोयलांचल में बालू घोटाले का बड़ा और लंबा खेल शुरू हो गया था.  एक हत्याकांड  काफी चर्चित हुआ था .  इस हत्याकांड ने तत्कालीन बिहार से लेकर बंगाल तक को हिला कर रख दिया था.कोलकाता की एक कंपनी के ऑडिटर की फिल्मी स्टाइल में हत्या कर दी गई थी.  जानकार बताते हैं कि कोलकाता की एक ऑडिट कंपनी ने अपने एक ऑडिटर एसएस दास   को बीसीसीएल में जांच के लिए भेजा था.  उन्होंने कोई बड़ी गड़बड़ी पकड़ ली थी और उस गड़बड़ी से बालू के बड़े-बड़े ठेकेदारों पर खतरा मंडराने लगा  था. 

    पहले  एसएस  दास को लालच दी गई ,नहीं माने तो हत्या हुई 
      
    पहले तो एसएस  दास को लालच देकर पाले  में करने की कोशिश हुई.  लेकिन जब वह नहीं माने तो उनके साथ बड़ा कांड हो गया.  लोग यह भी बताते हैं कि  दास को ऑडिट कंपनी की ओर से बीसीसीएल के कुसुंडा  क्षेत्र में ऑडिट के लिए भेजा गया था.  जानकार बताते हैं कि वह धनबाद के एक होटल में ठहरे  थे.  वहां से उनका अपहरण कर लिया गया और दूसरे दिन भूली रेलवे ट्रैक पर उनकी लाश मिली थी.  हत्यारों  ने इस हत्याकांड को आत्महत्या साबित करने की पूरी कोशिश की थी. पूरे कोयलांचल में तहलका मच गया था.  

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने कैसे भेद खोला कि यह हत्या है 

    लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भेद खुला कि यह  घटना आत्महत्या की नहीं, हत्या की है.  इसके बाद कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था.   घटना काफी सुर्खियां बटोरी थी.  दरअसल, नियम के मुताबिक कोयला का जहां से खनन होता था या अभी हो रहा है , वहां बालू भरने का नियम पहले भी था और आज भी है.  बड़े पैमाने पर बालू का ठेका -पट्टा  निर्गत होता था.  माफिया और उनके सहयोगी बालू बंकर  अपनी  सुविधा के अनुसार बांट लेते थे.  ठेका -पट्टा  भी अपनी मर्जी के अनुसार लेते थे.  नियम के अनुसार बालू की सप्लाई नहीं होती थी और उसमें "खेल" कर दिया जाता था.  आज इस "खेल" का दुष्परिणाम कोयलांचल भुगत रहा है.



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