रघुवर दास के बाद हेमंत सोरेन का ट्वाइस विदेश दौरा : झारखंड को कितना लाभ ,कितना नुकसान !!


धनबाद (DHANBAD) | झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा का सवाल है कि यदि निवेश लाने के लिए सरकारी कोष से विदेश यात्रा हो रही है, तो उसका सीधा लाभ झारखंड की जनता को मिलना चाहिए, ऐसा ना हो कि सरकारी खर्च पर यह केवल एक व्यक्तिगत दौरा बनकर रह जाए और मुख्यमंत्री खाली हाथ वापस लौट आये. उनका सुझाव है कि नई पूंजी के साथ-साथ सरकार को राज्य के पुराने और बंद पड़े उद्योगों को पुनर्जीवित करने पर भी विचार करना चाहिए, यह बात कई दिनों पहले उन्होंने कोडरमा में कही थी. बता दे कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन फिलहाल निवेश के तलाश में विदेश के दौरे पर है. हेमंत सोरेन के पहले कार्यकाल में भी वह विदेश गए थे. दूसरे कार्यकाल में भी गए है. अब सवाल उठता है कि कितना निवेश झारखंड में वह ला पाते हैं. वैसे, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल में भी हाथी उड़ा था. वह विदेश दौरे पर भी गए थे.
उद्योगों के लिए कितने अनुकूल हालत अब तक बनाये गए ?
अब सवाल उठता है कि अब तक कितना निवेश आया और क्या झारखंड में वैसी स्थिति बनी है, जिससे उद्योगपति यहां आकर्षित हो सकें यह अलग बात है कि रघुवर दास के समय में ही जमीन के मामलों में सुधार के प्रयास शुरू किए गए थे , लेकिन विरोध के आगे सारे प्रयास बेकार हो गए. झारखंड में आज भी जमीन बड़ा मुद्दा है और इस वजह से निवेशक यहां निवेश करना पसंद नहीं करते है. नेतागिरी भी बहुत बड़ी समस्या है. झारखंड के मुख्यमंत्री का तीसरा विदेश दौरा चल रहा है. सभी निवेश का न्योता देते हैं, लेकिन सवाल उठता है कि आखिर कितना निवेश आता है? हेमंत सोरेन के फिलहाल के दौरे पर विपक्ष सवाल भी कर रहा है. तो जान लीजिए 2017 में रघुवर दास जब मुख्यमंत्री थे, तो वह भी विदेश दौरे पर गए थे. उनके साथ अधिकारियों की टीम भी थी. कई उद्योगपतियों से मुलाकात भी हुई थी. आश्वासन मिला था लेकिन कितना निवेश हुआ, इसका कोई आंकड़ा सार्वजनिक नहीं हुआ है.
पहले कार्यकाल में भी हेमंत सोरेन न्योता देने गए थे विदेश
उसके बाद हेमंत सोरेन इसके पहले के कार्यकाल में भी विदेश दौरे पर गए थे. इस दौरे पर भी करोड़ों रुपए खर्च हुए थे. कितना निवेश हुआ , आंकड़ा सामने नहीं आया है. इससे पहले कोलकाता में बिजनेस मीट में भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हुए थे. निवेशकों को झारखंड आने का न्योता दिया गया था. यह अलग बात है कि गौतम अदानी झारखंड के मुख्यमंत्री से मिल चुके है. कुछ निवेश की दिशा में सकारात्मक बात भी हुई होगी। मुख्यमंत्री फिर एक बार निवेशकों को न्योता देने के लिए विदेश के दौरे पर हैं. उनके साथ अधिकारियों की टीम भी है. इधर, यह भी पता चला है कि झारखंड के पर्यटन मंत्री के नेतृत्व में एक टीम 18 जनवरी को लंदन पहुचेगीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में पांच सदस्य टीम पहले से दावोस पहुंच चुकी है. इस टीम में विधायक कल्पना सोरेन, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, वित्त सचिव प्रशांत कुमार और उद्योग सचिव अरवा राजकमल शामिल है.
पर्यटन मंत्री के नेतृत्व में भी भी जा रही टीम ,क्या है प्रोग्राम ?
वहीं पर्यटन मंत्री के नेतृत्व में जाने वाली टीम में गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल, पर्यटन सचिव मनोज कुमार, आईपीआरडी निदेशक राजीव लोचन बख्सी, खान निर्देशक राहुल कुमार सिंह, जनजातीय कल्याण आयुक्त कुलदीप चौधरी व उद्योग निदेशक विशाल सागर शामिल है. यह टीम लंदन में 20 जनवरी को विशेषज्ञों से बात करेगी, खैर जो भी हो ,लेकिन यह बात तो सच है कि मुख्यमंत्री के विदेश दौरे का लाभ झारखंड को कितना मिल पाता है ? उद्योगपतियों के लिए झारखंड में कितनी उपयुक्त व्यवस्था है ?जमीन मुहैया कराने के लिए क्या कोई विशेष तैयारी की गई है ?यह सब सवाल विपक्षी उठा रहे हैं , देखना होगा कि झारखंड को कितना निवेश मिल पाता है?
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
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