गुंजन ज्वेल्स डाका कांड: पुलिस पर भरोसा नहीं ,सोशल मीडिया से खोजे जा रहे क्रिमिनल्स

    गुंजन ज्वेल्स डाका कांड: पुलिस पर भरोसा नहीं ,सोशल मीडिया से खोजे जा रहे क्रिमिनल्स

    धनबाद(DHANBAD): न  जख्म सूखे हैं और ना ही अपराधियों का डर  खत्म हुआ है, और ना ही  जो आर्थिक नुकसान हुआ है, उसमें से ₹1 की भी भरपाई नहीं हुई है. पुलिस पर से तो अब भरोसा ही उठ गया है ,आश्वासन की खेती आखिर कितने दिनों तक चलेगी. यह सब कहना है गुंजन ज्वेलर्स के मालिक अर्चित अग्रवाल का.  उनका कहना है कि घटना के एक सप्ताह बाद ही पुलिस पर से उनका भरोसा उठ गया था. पुलिस वाले कहते हैं कि अपराधी सब नेपाल चले गए हैं. ऐसे में वह  क्या कर सकते हैं. सवाल उठता है कि जब मुथूट और गुंजन ज्वेल्स  के मामले को क्लब करने के बाद दावा किया जा रहा है कि मुथूट के अपराधी ही गुंजन  डाका  कांड में शामिल थे, तो दो अपराधी जो पकड़ में आए हैं, उनसे पुलिस क्या उगलवा रही है.

    गम और गुस्सा था अर्चित की आँखों में 

     The Newspost  की टीम ने जब गुंजन ज्वेल्स के मालिक से संपर्क किया तो उनकी आंखों में गम और गुस्सा दोनों था. गम आर्थिक नुकसान का था और गुस्सा पुलिस की कार्यशैली पर. आपको बता दें कि 3 सितंबर को सरेशाम  5 की संख्या में पहुंचे अपराधियों ने गुंजन में डाका कांड  को अंजाम दिया था.  इसके बाद  धनबाद में हलचल मच गई थी.  मालिक अर्चित अग्रवाल को अपराधियों ने गोली भी मारी थी, जिसका जख्म अभी भी हरा है.  डॉक्टर कहते हैं कि इस जख्म को भरने में काफी वक्त लगेगा. इसी के ठीक 3 दिन बाद 6 सितंबर को मुथूट में भी डाका डालने की कोशिश हुई,  जिसमें पुलिस की त्वरित कार्रवाई से एक डकैत मारा गया ,2 पकड़ लिए गए और 3 भाग निकले थे.

    खोखला दवा कर रही पुलिस 
     
    पुलिस ने दावा किया था कि दोनों कांडों में एक ही गिरोह का हाथ है तब  गुंजन ज्वेलर्स वालों को कुछ भरोसा हुआ था कि उन्हें उनका सामान वापस मिल सकता है और अपराधी गिरफ्तार हो सकते हैं. लेकिन हुआ ऐसा कुछ भी नहीं. इधर, गुंजन के मालिक सुमित अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर अपराधियों की तस्वीर जारी कर लोगों से अपील की है कि अगर इनके बारे में कोई भी जानकारी मिले तो सूचना दें. मतलब गुंजन के  मालिकों का पुलिस पर भरोसा कम गया है और वह इस प्रयास में हैं कि किसी भी सूत्र से अपराधियों की उन्हें सूचना मिले तो वह पुलिस को बता कर कुछ रिकवरी करा सके. देखना है कि आगे क्या होता है. 

    रिपोर्ट : शाम्भवी सिंह 


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