गोविंदाचार्य ने कहा-अटल- आडवाणी और मोदी- शाह  की कार्यशैली में कोई खास फर्क नहीं

    गोविंदाचार्य ने कहा-अटल- आडवाणी और मोदी- शाह  की कार्यशैली में कोई खास फर्क नहीं

    धनबाद(DHANBAD): राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संस्थापक और प्रसिद्ध चिंतक के एन गोविंदाचार्य ने कहा है कि फिलहाल देश की आर्थिक स्थिति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.  संपूर्ण गोवंश हत्याबंदी का कानून लाना होगा.  गोविंदाचार्य धनबाद की टुंडी के चेतन महाविद्यालय में तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के पूर्वी भारत कार्यकर्ता सम्मेलन में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने मजबूत नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया था.  परंतु देश में आपातकाल लगाकर उन्होंने अति  कर दी.  उनके सलाहकारों ने उन्हें गुमराह कर दिया था.  इंदिरा गांधी और जयप्रकाश नारायण में सुलह  के लिए चंद्रशेखर लगे हुए थे, परंतु सलाहकारों के कारण इंदिरा गांधी का रुख अड़ियल  रहा और तालमेल नहीं हो पाया.

    बांग्लादेश के  उदय से इंदिरा गांधी की जय जय  हुई थी 
     
     इंदिरा गांधी ने जब पाकिस्तान का विभाजन करा कर बांग्लादेश का उदय कराया था, तो देशभर में उनकी जयकारा हुई थी.  परंतु आपातकाल लगाकर उन्होंने अपनी छवि मटियामेट  कर ली थी.  गोविंदाचार्य ने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को  अहम  नहीं करना चाहिए. गोविंदाचार्य भाजपा पर भी बोलने से नहीं चूके , गोविंदाचार्य ने कहा कि काम करने का तरीका अलग-अलग हो सकता है, परंतु अटल- आडवाणी और मोदी- शाह  की कार्यशैली में कोई खास फर्क नहीं है.  भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय संगठन महामंत्री और आरएसएस के विचारक रहे  गोविंदाचार्य का मानना है कि देश में विकास मनुष्य को नहीं बल्कि प्रकृति को केंद्र में रखकर करना  चाहिए.  विकास के नाम पर प्रकृति के साथ की जा रही छेड़छाड़ को बंद करना होगा, वरना आने वाली पीढियां को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.  धनबाद की टुंडी में राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन का पूर्वी भारत कार्यकर्ता सम्मेलन में गोविंदाचार्य पहुंचे हुए थे. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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