ईसीएल के एसपी माइंस चितरा कोलियरी में ट्रांसपोर्टिंग बंद होने से सरकार को हो रही लाखों रुपए राजस्व की हानि, जानिए हड़ताल पर क्यों हैं ट्रांसपोर्टर 

    ईसीएल के एसपी माइंस चितरा कोलियरी में ट्रांसपोर्टिंग बंद होने से सरकार को हो रही लाखों रुपए राजस्व की हानि, जानिए हड़ताल पर क्यों हैं ट्रांसपोर्टर 

    देवघर (DEOGHAR): देवघर स्थित ईसीएल के एसपी माइंस चितरा कोलियरी में पिछले 4 दिनों से कोयला का ट्रांसपोर्टिंग बंद है. जिससे ईसीएल प्रबंधन को तो करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ ही है, साथ ही साथ सरकार को लाखों रुपए राजस्व की हानि भी हुई है.

    क्या है मामला

    दरअसल, ईसीएल प्रबंधन पर गुणवत्ता के अनुसार कोयला नहीं देने के कारण ट्रांसपोर्टर ने हड़ताल दिया हुआ है. ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि ईसीएल प्रबंधन की मनमानी के कारण कोयले का डिस्पैच और लोडिंग नहीं हो रही है. ट्रांसपोर्टरों का यह भी आरोप है कि उच्च क्वालिटी के कोयले की बजाए निम्न क्वालिटी का कोयला प्रबंधन द्वारा दिया जा रहा है. ट्रांसपोर्टरों के अनुसार 95000 रूपए की दर से उच्च क्वालिटी की कोयले की बिडिंग कराई गई थी, जिससे ट्रांसपोर्टरों को लगभग 48 रूपए करोड़ रुपया देना पड़ा था. लेकिन उठाव के वक्त ईसीएल प्रबंधन द्वारा निम्न क्वालिटी का कोयला दिया जा रहा है. 95 सौ प्रति हजार टन की जगह पर 12 सौ रुपए वाली कोयले का उठाव करने के लिए ईसीएल प्रबंधन द्वारा दबाव दिया जा रहा है. निम्न क्वालिटी के उठाव से ट्रांसपोर्टरों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. इसलिए अच्छी गुणवत्ता वाली कोयला उठाव की मांग ट्रांसपोर्टरों द्वारा की जा रही है.

    हड़ताल के कारण बढ़ी रोजगार की समस्या

    ट्रांसपोर्टरों द्वारा कोयला का उठाव नहीं होने से लगभग 3000 दैनिक मजदूरों के सामने रोजी रोजगार की समस्या उत्पन्न हो गई है. मजदूर आते तो हैं लेकिन निराशा से खाली हाथ वापस घर चले जाते हैं . इधर ईसीआर प्रबंधन ने पूरे मामले को संज्ञान लेते हुए कहा है कि इसकी अपने स्तर से जांच करा कर उचित कार्रवाई करेंगे।हालांकि प्रबंधन द्वारा इसे 1 महीने का पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाने की बात भी कही जा रही है. अगर ट्रांसपोर्टरों द्वारा इस पर भी आपत्ति जताई जाएगी तो इस योजना को भी बंद करने की बात कही जा रही है. बहरहाल यह मामला ईसीएल प्रबंधन और ट्रांसपोर्टरों के बीच का प्रतीत होता है लेकिन इसका खामियाजा दैनिक मजदूर को उठाना पड़ रहा है. अगर जल्द यह मामला नहीं सुलझा तो दैनिक मजदूरों के सामने विकट स्थिति उत्पन्न हो जाएगी.

    रिपोर्ट: रितुराज सिन्हा, देवघर


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