गढ़वा(GARHWA): झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव और पूर्व मंत्री मिथलेश ठाकुर ने पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के फैसले का सम्मान सर्वोपरि है और इसी भावना के तहत वे नई सरकार को बधाई देते हैं, लेकिन चुनावी प्रक्रिया को लेकर कई सवाल भी उठते हैं.
पूर्व मंत्री का कहना है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव का माहौल सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया जैसा नहीं था, बल्कि ऐसा लग रहा था मानो कोई बड़ा संघर्ष चल रहा हो. उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह किसी देश पर हमला करने के लिए सेना भेजी जाती है, उसी तरह चुनाव के दौरान देखने को मिला. यह सिर्फ चुनाव नहीं बल्कि एक तरह का राजनीतिक युद्ध था, जिसमें अलग-अलग संसाधनों और ताकत का व्यापक इस्तेमाल किया गया.
उन्होंने आगे कहा कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान आम जनता में भय का माहौल बन गया था. लोगों के बीच असुरक्षा की भावना साफ रूप से देखी जा सकती थी, जिससे उनके मतदान के अधिकार पर असर पड़ा. ठाकुर ने आरोप लगाया कि डर और दबाव के जरिए जनमत को प्रभावित करने की कोशिश की गई, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं. यह स्थिति लोकतांत्रिक पारदर्शिता के विपरीत है.
मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल भाजपा के लिए एक अहम राजनीतिक लक्ष्य था. अब उन्हें आशंका है कि आने वाले समय में इसी तरह की रणनीति अन्य राज्यों में भी अपनाई जा सकती है. उन्होंने संकेत दिया कि तमिलनाडु और केरल जैसे राज्य अगला फोकस हो सकते हैं, जहां राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिशें तेज हो सकती हैं.
असम चुनाव ने अपनी पार्टी के प्रदर्शन को सकारात्मक बताया. उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पहली बार वहां चुनाव लड़ा और लगभग डेढ़ प्रतिशत वोट हासिल किए. यह शुरुआत भले ही छोटी हो, लेकिन पार्टी के लिए महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने बताया कि कुछ सीटों पर पार्टी दूसरे और तीसरे स्थान पर भी रही. सउन्होंने भरोसा जताया कि उनकी पार्टी आने वाले समय में और मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी. साथ ही, अन्य राज्यों में भी संगठन का विस्तार कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की दिशा में काम करेगी.
रिपोर्ट- धर्मेन्द्र कुमार

