निलंबित चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम के खिलाफ दिल्ली में एफआईआर दर्ज, अवैध तरीके से 100 करोड़ से अधिक पैसे ट्रांसफर करने का मामला

    निलंबित चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम के खिलाफ दिल्ली में एफआईआर दर्ज, अवैध तरीके से 100 करोड़ से अधिक पैसे ट्रांसफर करने का मामला

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): अवैध तरीके से 100 करोड़ से अधिक पैसे ट्रांसफर करने के मामले में ग्रामीण कार्य विभाग के निलंबित चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम के खिलाफ दिल्ली में एफआईआर दर्ज हुआ है. ईडी की जांच में आए तथ्यों के आधार पर केस दर्ज किया गया है.

    बता दें कि फिलहाल निलंबित चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम ईडी की रिमांड पर हैं. पांच दिनों की रिमांड अवधि पूरी होने के बाद कोर्ट ने निलंबित चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम को चार दिनों के लिए और ईडी रिमांड पर भेज दिया. पीएमएलए कोर्ट ने ईडी को 4 दिनों का अतिरिक्त रिमांड दिया है.

    बुधवार को हुए गिरफ्तार

    विकास विशेष प्रमंडल के मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम के देश भर में कुल 24 ठिकानों पर लगातार दो दिनों की छापेमारी और करीब 30 घंटों की सघन पूछताछ के बाद ईडी ने बुधवार को उन्हें गिरफ्तार किया था. वीरेंद्र राम की गिरफ्तारी के बाद गुरूवार उन्हें मेडिकल जांच के लिए सदर अस्पताल लाया गया, जहां उनका कोरोना जांच भी किया गया. इसके बाद ईडी के अधिकारी उन्हें लेकर ईडी दफ्तर पहुंचे. जानकारी के अनुसार गुरूवार दोपहर दो बजे उन्हें ईडी के स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया. वहीं सूत्रों की माने तो कोर्ट में ईडी उन्हें 10 दिनों के रिमांड पर लेने की मांग रखी थी. ताकि मामले को लेकर आगे की पूछताछ जारी रह सके.  जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें पांच दिनों की रिमांड पर भेजा था, उसके बाद रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उन्हें दोबारा कोर्ट में पेश किया गया, जिसके बाद कोर्ट ने उनकी रिमांड अवधि को चार दिनों के लिए और बढ़ा दिया.

    कैसे आया भ्रष्टाचार के मामले में नाम

    दरअसल, जमशेदपुर के एक ठेकेदार विकास कुमार शर्मा की शिकायत पर झारखंड पुलिस की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने ग्रामीण विकास विभाग में कार्यरत एक जुनियर अभियंता सुरेश कुमार वर्मा को जमशेदपुर स्थित आवास 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया था, जिसके बाद 16 नवंबर 2019 में सुरेश प्रसाद वर्मा के आवास पर छापा मारी की गयी थी, इस छापेमारी में एसीबी की टीम को करीबन 2.44 करोड़ रुपये हाथ लगे थें. बाद में सुरेश कुमार वर्मा ने यह दावा किया था कि यह सारे पैसे अभियंता वीरेंद्र कुमार राम के हैं. इसके बाद ही इस मामले की जांच मनी लांड्रिंग अधिनियम के तहत शुरु कर दी गयी. 

    रिपोर्ट: समीर हुसैन, रांची

     


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