अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने मोदी सरकार पर किया हमला, आंकड़ा जारी कर गिनाई खामिया

    अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने मोदी सरकार पर किया हमला, आंकड़ा जारी कर गिनाई खामिया

    रांची : अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने देश में रोजगार और मजदूरी को लेकर मोदी सरकार पर बड़ा हमला किया है. उन्होंने बीते कुछ सालों का आंकड़ा पेश कर मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा. लोकतंत्र बचाओ अभियान द्वारा बुलाई गई प्रेस वर्ता में मीडिया को संबोधित करते हुए अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने कहा कि भारत में वास्तविक मजदूरी 2014-15 के बाद से बढ़ी ही नहीं. जबकि देश की जीडीपी बेहतर हुई है. वहीं देश की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था रूक सी गई है. देश के अनौपचारिक श्रमिकों का जीवन बेहद अनिश्चित है, खासकर झारखंड जैसे राज्यों में अनौपचारिक रोजगार लाखों लोगों की आजीविका का मुख्य स्रोत है. अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज और रीतिका खेरा ने श्रम ब्यूरो डेटा, पिरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे, कृषि मंत्रालय, सेंटर फॉर मॉनिट्रिंग द इंडियन इकानमी और सेंटर फॉर लेबर रिसर्च एंड आक्शन के डेटा की जानकारी दी. 

    मोदी सरकार के आने के बाद इन योजनाओं पर पड़ा प्रभाव

    उन्होंने कहा कि ऐसी ही स्थिति अधिकांश व्यवसायों, कृषि और गैर-कृषि पर भी प्रभाव पड़ा है. ज्यां द्रेज ने कहा कि 2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आयी, तब तक अनौपचारिक क्षेत्र पीडीएस, मनरेगा, मातृत्व लाभ, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और मध्याह्न भोजन कार्यक्रमों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ना शुरू हो गया था. लेकिन इन पांचों पर एनडीए सरकार ने किसी न किसी तरह से कमजोर कर दिया. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों में आईसीडीएस और मध्याह्न भोजन के लिए केंद्रीय बजट में वास्तविक रूप से 40 प्रतिशत की गिरावट आयी. सामाजिक सुरक्षा पेंशन में केंद्रीय योगदान मात्र 200 रुपए प्रति मह पर हो गई. मनरेगा में मजदूरी दर स्थिर हो गई. मातृत्व लाभ को सीमित कर दिया गया है. 

    योजनाओं की उपलब्धियां मोदी सरकार के दावों से बेहद कम

    जनगणना पर अर्थशास़्त्री ने कहा कि 2021 में जनगणना नहीं होने कारण तकरीबन 10 करोड़ से अधिक लोग अभी भी पीडीएस से बाहर है. झारखंड में ही तकरीबन 44 लाख लोगों को अभी भी राशन नहीं मिल रहा है. उन्होंने कहा कि बीते दस वर्षों में एनडीए सरकार ने शौचालय, स्वच्छ भारत, उज्ज्वला योजना और प्रधानमंत्री आवास योजनाओं में काम किया. सरकार इन योजनाओं में खर्च बढ़ाकर इस गिरावट की भरपाई की है. इन योजनाओं की उपलब्धियां मोदी सरकार के दावों से बेहद कम है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एनडीए सरकार ने 2019 में भारत को खुले में शौच मुक्त घोषित किया, 2019-21 के एनएफएचएस-5 डेटा से पता चलता है कि लगभग 20 प्रतिशत घरों में शौचालय की सुविधा नहीं थी.

    यूपीए के विपरीत है मोदी सरकार

    उन्होंने कहा कि अगर पुरानी और नयी योजनाओं पर मोदी सरकार का खर्च जीडीपी के हिस्से को देखेंगे तो पता चलेगा की मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहले की तुलना में योजनाओं पर खर्चा कम किया है. सिर्फ कोरोना काल में कुछ वृद्धि हुई थी. ज्यां द्रेज ने निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार ने अक्सर पुरानी योजनाओं का नाम बदलकर उन्हें अपनी योजना बनाने की कोशिश करती है. यह चीज यूपीए सरकार के तहत हुए सामाजिक सुरक्षा के बदलावों के विपरीत है. एनडीए सरकार का दावा और तथ्य जमीन पर नहीं दिखता है.


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