दुमका: बैठक में नहीं पहुंचे डीसी तो नाराज हुई राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ आशा लकड़ा, आयोग से की शिकायत, कार्रवाई की अनुशंसा 

    दुमका: बैठक में नहीं पहुंचे डीसी तो नाराज हुई राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ आशा लकड़ा, आयोग से की शिकायत, कार्रवाई की अनुशंसा 

    दुमका(DUMKA): राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ आशा लकड़ा रविवार को दुमका पहुची थी. क्षेत्र भ्रमण और कई संगठनों से बातचीत के साथ ही  सोमवार को डीसी के साथ बैठक निर्धारित थी. लेकिन बैठक में डीसी नहीं पहुच पाए.  जिससे नाराज आशा लकड़ा ने डीसी के खिलाफ कार्यवाई की अनुशंसा आयोग से की है. सोमवार की शाम परिसदन में आयोजित प्रेसवार्ता में डॉ लकड़ा ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि 24 घंटे से दुमका में रहने के बाबजूद डीसी ने बैठक में शामिल होना तो दूर, एक बार फ़ोन कॉल पर भी जानकारी नहीं दी गयी कि उनकी क्या व्यस्तता है. यह प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, इसलिए डीसी के खिलाफ कार्यवाई के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को पत्र लिखा गया है. उन्होंने यह भी कहा कि इस बाबत आयोग द्वारा मुख्य सचिव को पत्र भेजा गया है.

    आशा लकड़ा ने कई जन कल्याणकारी योजनाओं का निरीक्षण किया

    क्षेत्र भ्रमण के दौरान डॉ आशा लकड़ा ने कई जन कल्याणकारी योजनाओं का निरीक्षण किया. उन्होंने कहा कि आदिवासियों के हित में चल रही सरकारी योजना का हाल बेहद खराब है. कल्याण छात्रावास की स्थिति दयनीय है.  छात्रावास में रहने वाले छात्र नारकीय जीवन जीते हैं. कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुच पा रहा है. यहां के हालात को देखते हुए ही जिला प्रशासन के साथ बैठक निर्धारित किया गया था.

    जिला प्रशासन ने आयोग का समय बर्बाद किया; डॉ आशा लकड़ा

    प्रेसवार्ता के दौरान डॉ आशा लकड़ा ने कहा कि जिला प्रशासन ने आयोग का समय बर्बाद किया है.  उनका आरोप है कि प्रशासन ने प्रोटोकॉल का ख्याल नहीं रखा. कल्याण पदाधिकारी को साथ लगा दिया। वरीय अधिकारी आइटीडीए निदेशक भी नहीं आए. आयोग के अधिकारी और पीएस के साथ व्यवहार सही नहीं था.  श्रावणी मेला को लेकर अगर अधिकारी की व्यस्तता है तो यह उस वक्त ही बतानी चाहिए थी जब आयोग द्वारा कार्यक्रम निर्धारित कर जिला प्रशासन को भेजा गया था. उन्होंने कहा कि जब आयोग के साथ जिला प्रशासन का यह रवैया है तो किसी समस्या के समाधान की उम्मीद लेकर पहुचने वाले आदिवासियों के साथ कैसा व्यवहार होता होगा, समझा जा सकता है.

    रिपोर्ट: पंचम झा


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