भोलेनाथ के दिव्यांग भक्त ने नापी भोजपुर से देवघर की दूरी, जानें डेढ़ फीट के निराले भक्त की कहानी  

    भोलेनाथ के दिव्यांग भक्त ने नापी भोजपुर से देवघर की दूरी, जानें डेढ़ फीट के निराले भक्त की कहानी   

    दुमका(DUMKA):सावन का पावन महीना चल रहा है. सनातन धर्मावलंबी शिव उपासना में लीन हैं. हर तरफ भक्ति का माहौल है. दुमका के बासुकीनाथ धाम में विश्व प्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेला चल रहा है. देश-विदेश से भोले के भक्त यहां पहुंचकर फौजदारी बाबा पर जलार्पण कर रहे है. कहा जाता है कि फौजदारी बाबा सबों की मनोकामना पूर्ण करते हैं. देवाधिदेव महादेव औघड़दानी, शंकर, आशुतोष सहित कई नामों से जाने जाते हैं. इनका एक नाम भोले नाथ भी है. ये बड़े भोले हैं. इनके भक्त भी बड़े निराले होते हैं.

    भोले के अनोखे भक्त, 4 साल से आते हैं बाबाधाम

    इन दिनों बासुकीनाथ पहुंचे बाबा के एक भक्त की कहानी भी बड़ी निराली है. महज एक से डेढ़ फीट की शारीरिक संरचना लिए बिहार के भोजपुर से पहुंचे इनका नाम विकास कुमार है. बासुकीनाथ धाम आनेवाले श्रद्धालु जब नंदी चौक के रास्ते मंदिर की तरफ कदम बढ़ाते हैं, तो जरमुंडी थाना के पास विकास को बैठे देख भक्तों के कदम अनायास रुक जाते हैं.

    लोग रुककर करते हैं विकास का दीदार 

    विकास को देख कर भक्तों को ऐसा लगता है, मानो मंदिर से पहले उन्हें साक्षात भगवान के दर्शन हो गए. भक्त रुककर अनोखे शिव भक्त को प्रणाम करते हैं. आशीर्वाद लेते हैं, और स्वेच्छा से दान देकर आगे बढ़ते हैं. हो भी क्यों नहीं, आखिर भगवान विष्णु ने भी तो बामन अवतार लिया था. तभी तो श्रद्धालु कहते हैं कि साक्षात भगवान के दर्शन हो गए.

    दिव्यांग होने के बावजूद है बाबा से आस्था

    चलने फिरने से लाचार 38 बर्षीय विकास को किसी से कोई गिला शिकवा नहीं है. कहते है प्रभु की इक्षा के बगैर कुछ नहीं होता. चलने फिरने से लाचार होने की वजह से सेवादार के रूप में 2 लड़के को रखे हैं. 4 वर्षों से सावन के महीने में बासुकीनाथ आ रहे हैं. बाबा के भक्तों से जो मिल जाता है, उसी से गुजरा हो जाता है. बिहार सरकार से आज तक किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला. बासुकीनाथ आने पर रहने में परेशानी होती है.

    बिहार सरकार की किसी योजना का भी नहीं मिलता लाभ

    अगर सर छिपाने के लिए जगह मिल जाती तो, बेहतर होता. विकास की शारीरिक अवस्था वैसे लोगों के लिए एक मिसाल है, जो दिव्यांगता को अभिशाप मानते है. इनके शारीरिक बनावट ही भक्तों के दिल मे इनके प्रति आस्था उत्पन्न करती है. इनका विचार आम लोगों के लिए एक संदेश है कि जीवन मे लाख विपत्ति आए, घबराना नहीं चाहिए.

    रिपोर्ट-पंचम झा


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