Dhanbad: निरसा में लाल झंडा -भगवा में टकराहट  की क्या थी असली वजह, पढ़िए इस रिपोर्ट में 

    Dhanbad:  निरसा में लाल झंडा -भगवा में टकराहट  की क्या थी असली वजह, पढ़िए इस रिपोर्ट में 

    धनबाद(DHANBAD): आखिर निरसा में टकरा ही गए माले  और भाजपा समर्थक.  तनाव तो चुनाव के दौरान भी था और चुनाव के बाद भी है.  बहुत पहले लाल झंडे में ही टकराहट होती थी.  लेकिन अब लाल झंडा और भगवा में टकराहट बढ़ रही है.  दरअसल, पूर्व विधायक अपर्णा सेनगुप्ता जब फॉरवर्ड ब्लॉक में थी और अरूप  चटर्जी मासस  में थे.  तो भी टकराहट होती थी.  अब अरूप  चटर्जी माले  के हो गए हैं, तो अपर्णा सेनगुप्ता भाजपा की पूर्व विधायक है.  पहले बताते हैं कि टकराहट पर किसने क्या कहा- विधायक अरूप  चटर्जी - शांतिपूर्ण धरना शुरू किया गया था.  कंपनी के ठेकेदार और उनके गुर्गो  ने फायरिंग की, टेंट जला दिया.  प्रशासन की लापरवाही के कारण ऐसा हुआ.  महिलाओं पर पत्थरबाजी कर घायल कर दिया गया.  पूर्व विधायक अपर्णा सेन  गुप्ता - जब से माले  जीती है, आतंकवाद का माहौल बन गया है.  गोपीनाथपुर कोलियरी  खुलने पर नियोजन मिलने की आशा थी.  विधायक को यह  रास नहीं आई.  उन्होंने यहां भी लूट मचाने का प्रयास किया. 

    आउटसोर्सिंग परिसर  में धरना को लेकर शुरू हुआ विवाद 
     
    दरअसल, वर्चस्व को लेकर भाजपा समर्थित गोपीनाथपुर कोलियरी बेरोजगार संघर्ष मोर्चा और माले  समर्थित निरसा  बेरोजगार संघर्ष समिति के बीच सोमवार को ईसीएल  के गोपीनाथपुर कोलफील्ड प्राइवेट लिमिटेड आउटसोर्सिंग परिसर  में हिंसक झड़प हो गई.  इस दौरान दोनों पक्षों में जमकर पथराव हुआ.  झड़प में तीन पुलिसकर्मी समेत एक दर्जन लोग घायल हो गए है.  आउटसोर्सिंग परिसर कई घंटे तक रण क्षेत्र बना रहा.  सुबह   10 बजे से लेकर रात 8 बजे तक रुक-रुक कर दोनों पक्षों में मारपीट होती रही.  दरअसल, माले  समर्थक आउटसोर्सिंग में धरना देने की तैयारी कर रहे थे.  टेंट लगा  रहे थे.  इसका भाजपा समर्थित मोर्चा ने  विरोध किया.  इस पर विवाद बढ़ गया और मारपीट, पत्थरबाजी तक मामला पहुंच गया.  

    झड़प  के दौरान दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर जमकर पत्थरबाजी की

    झड़प  के दौरान दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर जमकर पत्थरबाजी की.  इस दौरान  माले समर्थको के  अर्द्ध निर्मित टेंट में आग लगा दी गई.  माले  समर्थकों का आरोप है कि भाजपा समर्थको ने आग लगाईं.  एक तरह से कहा जा सकता है कि निरसा  में वर्चस्व की जंग छिड़ गई है.  2024 के विधानसभा चुनाव में अरूप  चटर्जी विजई हुए है.  जबकि अपर्णा सेनगुप्ता चुनाव हार गई है.  चुनाव हारने के बाद भी इलाके में अपर्णा सेनगुप्ता की सक्रियता बनी हुई है.  2019 में  चुनाव हारने के बाद अरूप  चटर्जी निरसा  की हर एक समस्याओं को लेकर सक्रिय रहे थे.  नतीजा हुआ कि कम वोट से ही सही, निरसा  सीट अरूप  चटर्जी ने माले  के टिकट पर जीत ली है.  तो भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही अपर्णा सिंह गुप्ता चुनाव हार गई है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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